अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले में एक सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल का बयान इन दिनों चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल ने पाकिस्तान और आजादी के समय के भारतीय नेतृत्व को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने शैक्षणिक और राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
यह बयान ब्यावर स्थित सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया। यह कॉन्फ्रेंस 23 और 24 जनवरी को आयोजित हुई थी।
कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मनोज बेहरवाल ने कहा कि
14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान का जन्म हुआ और 15 अगस्त 1947 को भारत अस्तित्व में आया।
उन्होंने कहा:
“पाकिस्तान हमसे लगभग 12 घंटे पहले बना, इसलिए पाकिस्तान हमसे बड़ा है। इस मायने में वह हमारा बड़ा भाई है।”
उनके इस बयान के बाद सम्मेलन में मौजूद कई प्रतिभागी चौंक गए और बाद में यह टिप्पणी सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में चर्चा का विषय बन गई।
मनोज बेहरवाल ने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि आजादी के समय देश में केवल तीन ही बड़े नेता थे—
महात्मा गांधी
मोहम्मद अली जिन्ना
डॉ. भीमराव अंबेडकर
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि उस समय जवाहरलाल नेहरू का नाम प्रमुख नेताओं में शामिल नहीं था।
बेहरवाल ने अपने तर्क को स्पष्ट करने के लिए एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि आजादी के समय विदेशी पत्रकार इंटरव्यू के लिए भारत आए थे।
पहले वे गांधी जी के पास गए, लेकिन रात होने के कारण वे सो चुके थे
फिर जिन्ना के पास गए, वहां भी वे उपलब्ध नहीं मिले
अंत में रात करीब 12 बजे वे डॉ. अंबेडकर के पास पहुंचे
उनके अनुसार, अंबेडकर उस समय हिंदू कोड बिल की तैयारी कर रहे थे। जब पत्रकारों ने उनसे देर रात तक जागने का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा:
“उन दोनों के समाज जाग चुके हैं, इसलिए वे सो गए हैं। मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है।”
मनोज बेहरवाल ने यह भी कहा कि भारत ने पाकिस्तान को शुरुआती दौर में 45 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी थी, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके।
हालांकि, उनके अनुसार पाकिस्तान ने उस धन का सही उपयोग नहीं किया और उसे आतंकवाद में बर्बाद कर दिया।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर यह सोचा कि वह बहुत कुछ हासिल कर लेगा, लेकिन उसके फैसलों का परिणाम उसके सामने है।
बेहरवाल ने प्रतीकात्मक भाषा में कहा कि पाकिस्तान को पहले “घुट्टी पिलाई गई, गीत गाए गए और नहलाया गया”, यानी उसे पहले तैयार किया गया।
उनके अनुसार, इसी कारण पाकिस्तान पहले अस्तित्व में आया और भारत बाद में।
कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मनोज बेहरवाल ने यह भी कहा कि
2014 के बाद पहली बार भारतीय राजनीति और भारतीय समाज के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा का सीधा संबंध बना है।
उन्होंने दावा किया कि इससे पहले राजनीति समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम करती थी, जिससे समाज भ्रमित और परेशान रहता था।
बेहरवाल ने डॉ. अंबेडकर का हवाला देते हुए कहा कि
जो कौम अपना इतिहास नहीं जानती, उसका पतन निश्चित है।
उन्होंने यह भी कहा कि पढ़े-लिखे वर्ग का समाज से जुड़ाव कमजोर हो गया है और शिक्षित लोगों को समाज के लिए लगातार काम करते रहना चाहिए।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत के 7 राज्यों, राजस्थान के 20 से अधिक जिलों और तीन विदेशी देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में:
विशिष्ट अतिथि: सीए अंकुर गोयल
मुख्य वक्ता: प्रो. एम. एल. शर्मा (राजस्थान विश्वविद्यालय)
अध्यक्षता: प्राचार्य डॉ. रेखा मंडोवरा
समन्वयक: डॉ. दुष्यंत पारीक
सह-समन्वयक: डॉ. मानक राम सिंगारिया
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर हरीश कुमार और श्वेता स्वामी ने किया।
अजमेर के सरकारी कॉलेज के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल का यह बयान इतिहास, राजनीति और राष्ट्र की संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को छूता है। पाकिस्तान को “बड़ा भाई” कहना और आजादी के समय के नेताओं को लेकर की गई टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शैक्षणिक मंचों पर दिए गए बयानों की जिम्मेदारी और प्रभाव कितना गहरा होता है।
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