नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय गंभीर व्यापारिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों पर लगाए गए उच्च आयात शुल्क (टैरिफ) ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। भारत पर अमेरिका द्वारा कुछ उत्पादों पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने से भारतीय निर्यात और उद्योगों पर सीधा दबाव पड़ा है। ऐसे में 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट भारत के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला रोडमैप साबित हो सकता है।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ का सबसे बड़ा झटका भारत के निर्यात सेक्टर को लगा है।
भारत से अमेरिका को जाने वाले कई उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने के तर्क पर लगाया गया है, जबकि अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क रूस से तेल आयात को लेकर लगाया गया है। इससे कुल मिलाकर कुछ भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लग गया है।
इसका सीधा असर कपड़ा, चमड़ा, खिलौना, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में अमेरिका को होने वाले भारत के माल निर्यात में 1.83 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसके साथ ही अमेरिका भारत पर कृषि और डेयरी सेक्टर को अपने उत्पादों के लिए खोलने का दबाव भी बना रहा है। यदि भारत जल्द संतुलित रणनीति नहीं अपनाता है, तो घरेलू किसानों और छोटे उद्योगों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
केंद्र सरकार बजट 2026 के जरिए अमेरिकी टैरिफ के तात्कालिक और दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने की रणनीति बना सकती है। सरकार का फोकस केवल घरेलू खपत बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्यात सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैश्विक बाजारों में भारत की पकड़ मजबूत करने पर रहेगा।
सरकार उन सेक्टर्स को राहत देने की योजना बना सकती है, जिन पर टैरिफ का सबसे ज्यादा असर पड़ा है। इसके तहत 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के जरिए निर्यातकों को सस्ते ऋण और ब्याज में छूट देने का प्रावधान हो सकता है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को सुरक्षित करने के लिए छोटे निर्यातकों के ऋण पर 85 प्रतिशत तक सरकारी गारंटी देने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा भारतट्रेडनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नौकरशाही अड़चनों को कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर भी जोर दिया जा सकता है।
सरकार अमेरिका के साथ रक्षा सौदों के जरिए व्यापार घाटे को संतुलित करने की दिशा में भी कदम उठा सकती है। बजट में जीई एफ414 फाइटर जेट इंजन और एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन सौदों के लिए शुरुआती पूंजी आवंटन का प्रावधान संभव है। 31 प्रीडेटर ड्रोन के लिए करीब 32 हजार करोड़ रुपये के समझौते को भी बजट समर्थन मिल सकता है।
इसके साथ ही भारत में अमेरिकी रक्षा उपकरणों के रखरखाव और मरम्मत के लिए एमआरओ हब स्थापित करने की योजना पर काम किया जा सकता है। इससे देश में उच्च तकनीक वाली नौकरियों का सृजन होगा और तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
रक्षा क्षेत्र से जुड़े स्टार्टअप्स और एमएसएमई को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वायत्त प्रणालियों में आगे बढ़ाने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड से मदद मिलने की संभावना है। इसका उद्देश्य करीब 1.9 लाख नौकरियों को सुरक्षित रखना है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बजट 2026 में निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार भारत को अमेरिका पर निर्भरता कम कर दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और यूरोप जैसे बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी।
इसके साथ ही व्यापार करने की लागत घटाने, विनियामक स्पष्टता लाने और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने जैसे सुधार भी जरूरी होंगे। कपड़ा, चमड़ा और रत्न जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता पैकेज की मांग भी लगातार उठ रही है।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक भारत अब अपनी अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बजट में क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के लिए प्रावधान किए जा सकते हैं, ताकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी जैसी अहम सप्लाई चेन सुरक्षित की जा सके।
इसके अलावा एक्सिम बैंक के जरिए नए बाजारों में भारतीय उत्पादों और रक्षा उपकरणों के निर्यात के लिए क्रेडिट लाइन बढ़ाने का प्रस्ताव भी बजट का हिस्सा बन सकता है।
केंद्रीय बजट 2026 केवल आर्थिक आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह तय करेगा कि भारत अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार तनाव के बीच किस दिशा में आगे बढ़ेगा। यदि सरकार निर्यातकों को राहत, एमएसएमई को सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में संतुलित सौदे और नए वैश्विक बाजारों में विस्तार की रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करती है, तो यह बजट भारत को तात्कालिक झटकों से उबारने के साथ-साथ लंबी अवधि में मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की ओर ले जा सकता है।
अब देश की नजर 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले बजट पर टिकी है।
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