जयपुर: दौसा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विधायक और तहसीलदार के बीच हुई बहस अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। दौसा से कांग्रेस विधायक Dindayal Bairwa ने तहसीलदार Gajanand Meena के खिलाफ विधानसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
विधानसभा स्पीकर ने नोटिस स्वीकार करते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब यह मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है, जहां जांच के बाद कार्रवाई तय होगी।
2 फरवरी को जयपुर-दौसा हाईवे पर ट्रक यूनियन ऑफिस के सामने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी। इसी दौरान विधायक बैरवा मौके पर पहुंचे और कार्रवाई का विरोध किया।
तहसीलदार गजानंद मीणा और विधायक के बीच तीखी बहस हो गई। बैरवा ने आरोप लगाया कि तहसीलदार ने बदसलूकी की और धमकी दी। वहीं, बहस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें तहसीलदार को कहते सुना गया—
“इस जमीन का मालिक मैं हूं।”
इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया।
विधायक बैरवा ने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि “सभी 200 विधायकों और स्पीकर का अपमान” बताया।
उन्होंने कहा—
“तहसीलदार की औकात क्या है कि विधायक से उलझ जाए? उसे सरकार और बीजेपी का संरक्षण मिला हुआ है, वरना अब तक कार्रवाई हो जाती।”
यह मामला विधानसभा में तीन बार उठ चुका है। बैरवा ने सदन में प्रदर्शन भी किया। नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने भी कार्रवाई की मांग की।
मामला विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है। 11 सदस्यीय समिति में अध्यक्ष सहित 6 बीजेपी, 3 कांग्रेस, 1 निर्दलीय और 1 बीएपी विधायक शामिल हैं।
यदि तहसीलदार दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन, वेतन वृद्धि रोकने या अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन में वोटिंग भी कराई जा सकती है।
राजस्थान विधानसभा विशेषाधिकार हनन के मामले में पहले भी सख्त कार्रवाई कर चुकी है। वर्ष 2013 में एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को 30 दिन की जेल की सजा सुनाई गई थी। तत्कालीन स्पीकर Deependra Singh Shekhawat ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और सजा पर अस्थायी रोक लगी थी।
यह मामला अब केवल एक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे “ब्यूरोक्रेसी बनाम जनप्रतिनिधि” के रूप में देखा जा रहा है। विधायक बैरवा ने आरोप लगाया कि अफसरशाही हावी हो गई है और दलित विधायकों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है।
दूसरी ओर, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कानून के अनुसार की जा रही थी।
दौसा तहसीलदार और विधायक के बीच की बहस अब विधानसभा की चौखट तक पहुंच चुकी है। विशेषाधिकार हनन नोटिस मंजूर होने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
अब सबकी नजर विशेषाधिकार समिति की जांच और स्पीकर के अंतिम फैसले पर टिकी है। क्या तहसीलदार पर कड़ी कार्रवाई होगी या मामला राजनीतिक रस्साकशी में उलझेगा—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
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