नई दिल्ली/देहरादून। एक बयान, कुछ शब्द और पूरा देश सुलग उठा। उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू का बयान इन दिनों देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श के केंद्र में है। “बिहार में 20–25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं” जैसी टिप्पणी ने न सिर्फ महिलाओं के सम्मान पर सवाल खड़े किए, बल्कि भारतीय राजनीति को भी आमने-सामने ला खड़ा किया।
यह बयान एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही वायरल हो गया। इसके बाद बिहार से लेकर उत्तराखंड तक तीखी प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। मंत्री के पति का विवादित बयान अब सिर्फ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं रह गया, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सामाजिक सोच और राजनीतिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल बन चुका है।
गिरधारी लाल साहू ने कथित तौर पर कुंवारे युवकों को बिहार से शादी करने की सलाह देते हुए कहा कि वहां 20–25 हजार रुपये में लड़कियां मिल जाती हैं। इस बयान को महिलाओं को “खरीदने-बेचने” जैसी सोच से जोड़कर देखा गया। आलोचकों का कहना है कि यह न सिर्फ बिहार की महिलाओं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं का अपमान है।
बयान के बाद साहू ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, लेकिन राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी के अंदर से ही तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बिहार बीजेपी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने बयान को “शर्मनाक” और “मानसिक दिवालियापन” करार दिया। उन्होंने कहा कि महिला कोई वस्तु नहीं है, जिसे पैसों में तौला जाए। यह बयान समाज के लिए बेहद खतरनाक सोच को दर्शाता है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इस विवाद से असहज है, क्योंकि बयान एक ऐसी मंत्री के परिवार से जुड़ा है, जो महिला सशक्तिकरण जैसे संवेदनशील विभाग को संभालती हैं।
नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी इस बयान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि महिलाओं का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने महिलाओं को माता और बहन का रूप बताते हुए बयान की तीखी निंदा की।
वहीं, आरजेडी नेताओं ने इसे बिहार और यहां की महिलाओं के खिलाफ गहरी मानसिकता का प्रतीक बताया। पार्टी का कहना है कि इस तरह के बयान बिहार की छवि को जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश हैं।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथोंहाथ लेते हुए भाजपा पर बड़ा हमला बोला। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि बिहार और उसकी महिलाओं का अपमान करना भाजपा का स्वभाव बन गया है। उन्होंने मांग की कि पार्टी इस मामले में कड़ी कार्रवाई करे और सार्वजनिक रूप से बिहार की जनता से माफी मांगे।
कांग्रेस प्रवक्ता असीत नाथ तिवारी ने तंज कसते हुए कहा कि इस तरह की “संस्कारहीन सोच” संघ की कार्यशालाओं में तैयार होती है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्री के पति का विवादित बयान आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। महिला संगठनों की ओर से कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठ सकती है। साथ ही, यह सवाल भी जोर पकड़ रहा है कि क्या सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के परिवारों की जिम्मेदारी भी राजनीतिक दलों को तय करनी चाहिए।
निष्कर्ष:
गिरधारी लाल साहू का बयान एक व्यक्ति की सोच से कहीं आगे जाकर पूरे सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। माफी के बावजूद राजनीतिक और सामाजिक गुस्सा कम नहीं हुआ है। सवाल यही है—क्या ऐसे बयानों पर सिर्फ माफी काफी है, या अब जवाबदेही और ठोस कार्रवाई का समय आ गया है?
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