नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर वैचारिक जंग का मैदान बन गया है। 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद परिसर में हुए विरोध प्रदर्शनों पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कड़ा ऐतराज जताया है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को कहा कि जेएनयू जैसी संस्थाओं में आतंकवादियों का समर्थन और देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल पूरे देश को स्तब्ध करने वाला है।
"देश विरोधी नारों से राष्ट्र सदमे में" - मुख्यमंत्री राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर संवाददाताओं से बात करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जेएनयू की घटनाओं को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा, "यह विचलित करने वाला है कि छात्र उन लोगों की जमानत की मांग कर रहे हैं जो दंगों के आरोपी हैं। विश्वविद्यालय में राष्ट्र के खिलाफ बोलना और अशोभनीय नारेबाजी करना युवाओं की प्रगतिशील भूमिका के विपरीत है।" उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्र को प्रगति की ओर ले जाने में अपनी भूमिका निभाएं, न कि ऐसी गतिविधियों का हिस्सा बनें।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई: 5 जनवरी की घटना पर FIR बता दें कि 5 जनवरी को जेएनयू परिसर में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित उकसावे वाली नारेबाजी हुई थी। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस उन बयानों की जांच कर रही है जिनसे सार्वजनिक उपद्रव फैलने की आशंका थी।
उपराष्ट्रपति की सीख: "टकराव हो, पर अंतिम परिणाम निष्कर्ष हो" जेएनयू के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने लोकतंत्र की परिभाषा साझा की। उन्होंने कहा, "एक स्वस्थ लोकतंत्र में बहस, चर्चा और असहमति आवश्यक तत्व हैं। यहाँ तक कि टकराव भी हो सकता है, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य किसी सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुँचना होना चाहिए।"
उन्होंने छात्रों से तीन मुख्य जिम्मेदारियों का आह्वान किया:
बौद्धिक ईमानदारी: सत्य की खोज में हमेशा ईमानदार रहें।
सामाजिक समावेशन: समाज की असमानताओं को कम करने का प्रयास करें।
राष्ट्र सेवा: अपनी डिग्री और कौशल को 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने में लगाएं।
JNU की उपलब्धियां: 70 करोड़ का कॉर्पस फंड दीक्षांत समारोह के दौरान कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि जेएनयू ने ऐतिहासिक संकाय भर्ती पूरी की है और रिकॉर्ड 70 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड जुटाया है। वर्तमान में जेएनयू 9,100 छात्रों और दर्जनों पीएचडी व मास्टर कार्यक्रमों के साथ अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ रहा है।
जेएनयू में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रवाद के बीच की बहस एक बार फिर गरमा गई है। जहाँ मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सम्मान को सर्वोपरि बताया, वहीं उपराष्ट्रपति ने असहमति के लोकतांत्रिक अधिकार के साथ 'सहयोग की सामूहिक इच्छा' पर जोर दिया। शैक्षणिक संस्थानों में स्वस्थ विमर्श और अनुशासन के बीच संतुलन बनाना ही भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती है।
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