गांधीनगर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गुजरात दौरे के दौरान सनातन धर्म की शक्ति और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर बड़ा बयान दिया है। गांधीनगर में 267 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंचे शाह ने सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि भारत की आस्था और संस्कृति को खत्म करना किसी भी शक्ति के लिए आसान नहीं है।
"हमलावर मिटे, मंदिर गर्व से खड़ा है" अमित शाह ने सोमनाथ मंदिर पर सदियों से हुए विदेशी आक्रमणों का जिक्र करते हुए कहा कि सोमनाथ का इतिहास भारत के स्वाभिमान का इतिहास है। उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने सोमनाथ मंदिर पर हमले किए, उसे नष्ट करने की कोशिश की, वे खुद मिट गए और इतिहास के पन्नों में दफन हो गए। लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी उसी स्थान पर पूरे गौरव और भव्यता के साथ खड़ा है। हमारा सनातन धर्म सूरज और चांद की तरह अमर है, इसे कोई नहीं मिटा सकता।"
1000 साल बाद 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' गृह मंत्री का यह बयान ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि महमूद गजनी ने साल 1026 में सोमनाथ मंदिर पर भीषण हमला कर उसे लूटा और तोड़ा था। साल 2026 इस हमले के और मंदिर के पुनर्निर्माण के संघर्ष के 1000 साल पूरे होने का प्रतीक है।
इसी उपलक्ष्य में 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का शुभारंभ किया था।
शाह ने रेखांकित किया कि मंदिर को 16 बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार यह और भी भव्य रूप में पुनर्जीवित हुआ, जो भारतीयों की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
विकास और विरासत का संगम गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में शाह ने न केवल वैचारिक संदेश दिया, बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए 267 करोड़ रुपये की योजनाओं की सौगात भी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज भारत अपनी आध्यात्मिक जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ आधुनिक बुनियादी ढांचे का भी निर्माण कर रहा है।
अमित शाह का यह संबोधन न केवल सोमनाथ के गौरव का गान है, बल्कि उन शक्तियों को एक कड़ा संदेश भी है जो सनातन संस्कृति पर सवाल उठाते हैं। 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के माध्यम से सरकार देश की युवा पीढ़ी को यह याद दिलाना चाहती है कि भारत की सांस्कृतिक चेतना विनाशकारी हमलों के बावजूद अक्षुण्ण रही है।
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