राजस्थान: के सीकर जिले में आयोजित विश्वप्रसिद्ध खाटूश्याम लक्खी मेला इस बार भी भक्ति, सेवा और भव्य व्यवस्थाओं के कारण चर्चा में है। लेकिन इस बार आकर्षण का केंद्र बना है—रींगस से खाटू मार्ग पर लगा एक ऐसा भंडारा, जिसका मेन्यू किसी 5-स्टार होटल को भी मात दे रहा है।
करीब 150 तरह के पकवान, 65 एक्सपर्ट हलवाई, रोज बदलता मेन्यू, फ्री मेडिकल सुविधा और विश्राम व्यवस्था—यह सब श्याम भक्तों की सेवा में समर्पित है।
बाजरे का खिचड़ा, गुलाब जामुन, इमरती, लापसी, जलेबी, लड्डू, पेड़े, रसगुल्ला, रबड़ी… और फिर चाट-पापड़ी, दही बड़ा, टिकिया, गोलगप्पे, डोसा, इडली, सांभर, चाऊमीन, स्प्रिंग रोल, मंचूरियन तक!
पहली नजर में यह किसी लग्जरी होटल का मेन्यू लगता है, लेकिन असल में यह प्रसादी है, जो श्याम भक्तों को प्रेमपूर्वक परोसी जा रही है।
रींगस–खाटू मार्ग पर तोरण द्वार से लगभग 1.5 किलोमीटर पहले लगे इस भंडारे में प्रवेश करते ही सबसे पहले पानी की स्टॉल मिलती है। आगे दाएं-बाएं अलग-अलग काउंटरों पर मिठाइयां, चाट और मुख्य भोजन परोसा जा रहा है।
भंडारे के संचालक हरियाणा के गुड़गांव से विधायक मुकेश शर्मा हैं। वे पिछले 31 वर्षों से यहां सेवा दे रहे हैं। उनका कहना है कि “श्याम हमारे आराध्य हैं। यह भंडारा सेवा का माध्यम है।”
खास बात यह है कि यहां एक बार बनी सब्जी या दाल दोबारा नहीं बनाई जाती। हर दिन नया मेन्यू तैयार होता है।
एक बीघा क्षेत्र में विशाल रसोई बनाई गई है, जहां करीब 65 हलवाई अलग-अलग पकवान तैयार करते हैं। हर डिश के लिए संबंधित विशेषज्ञ हलवाई को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मेले में रोजाना लाखों श्रद्धालु खाटू पहुंचते हैं। दर्शन से पहले और बाद में बड़ी संख्या में भक्त इस भंडारे में प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।
कई श्रद्धालु बताते हैं कि यहां मिलने वाला भोजन स्वाद और व्यवस्था के मामले में किसी बड़े होटल से कम नहीं है।
एक बार में करीब 200 सेवादार भोजन परोसते हैं। सेवादारों में शर्मा परिवार के सदस्य और गुड़गांव से आए कार्यकर्ता शामिल हैं।
भंडारे की खासियत सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है। मुख्य टेंट में मेडिकल टीम का काउंटर भी लगाया गया है।
पैदल चलकर आने वाले श्रद्धालुओं के पैरों में छाले या थकान की समस्या होती है। यहां मरहम-पट्टी, प्राथमिक उपचार और एक्यूप्रेशर थैरेपी की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा विश्राम के लिए अलग से व्यवस्था की गई है, जहां भक्त थोड़ी देर आराम कर सकते हैं।
मुकेश शर्मा के भाई काले शर्मा बताते हैं कि 31 साल पहले यह सेवा चाय-पकौड़े से शुरू हुई थी। धीरे-धीरे भक्तों की संख्या बढ़ती गई और आज यह 150 पकवानों वाले भव्य भंडारे में बदल चुका है।
हर साल मेले से पहले गुड़गांव से पैदल यात्रा शुरू होती है। 8 फरवरी को यात्रा निकलती है और 13 फरवरी को खाटू पहुंचकर बाबा के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद 14 फरवरी से भंडारा शुरू हो जाता है, जो 28 फरवरी तक चलता है।
भंडारे में बाबा श्याम के भजनों की मधुर धुन पर भक्त झूमते नजर आते हैं। वातावरण में भक्ति, सेवा और समर्पण का अनोखा संगम दिखाई देता है।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामूहिक सेवा भावना का भी उदाहरण है।
खाटूश्यामजी मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
लक्खी मेले में लाखों की संख्या में भक्त आते हैं, इसलिए इसे ‘लक्खी’ मेला कहा जाता है।
भंडारे जैसी व्यवस्थाएं इस मेले को और भव्य बनाती हैं।
मुकेश शर्मा के बेटे अंशुल शर्मा बताते हैं कि पूरा परिवार और कार्यकर्ता टीम सेवा में जुटी है। कोई पानी पिला रहा है, कोई भोजन परोस रहा है, तो कोई मेडिकल सेवा दे रहा है।
यह आयोजन केवल संसाधनों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि समर्पण और सेवा का जीवंत उदाहरण है।
खाटूश्याम मेले में लगा यह भंडारा केवल 150 पकवानों का आकर्षण नहीं है, बल्कि 31 वर्षों की सेवा, भक्ति और समर्पण की परंपरा का प्रतीक है।
65 हलवाई, सैकड़ों सेवादार और हजारों भक्त—यह दृश्य बताता है कि जब आस्था और सेवा का संगम होता है, तो आयोजन 5-स्टार से भी भव्य हो जाता है।
यह भंडारा श्याम भक्तों के लिए केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रसाद और प्रेम का अनुभव है।
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