उत्तर प्रदेश: की राजधानी लखनऊ में एक दिल दहला देने वाली वारदात का खुलासा हुआ है। पैथोलॉजी संचालक मानवेंद्र सिंह की हत्या उनके ही बेटे अक्षत प्रताप सिंह उर्फ राजा ने कर दी। पुलिस के अनुसार, NEET परीक्षा को लेकर हुए विवाद के बाद 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे लाइसेंसी .315 बोर राइफल से गोली मारकर हत्या की गई।
हत्या के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश में शव के हाथ-पैर काटे, उन्हें पॉलिथीन में भरकर करीब 21 किलोमीटर दूर नादरगंज के पास नहर किनारे झाड़ियों में फेंक दिया, जबकि धड़ को नीले ड्रम में भरकर घर में छिपा दिया। खून से सनी चादर को अनौरा जंगल में जला दिया गया।
मामले का खुलासा आशियाना थाना पुलिस ने मीडिया के सामने किया। आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट खुद उनके बेटे अक्षत ने दर्ज कराई थी। परिवार और पुलिस को गुमराह करने के लिए वह थाने पहुंचा और पिता के लापता होने की कहानी सुनाई।
जांच के दौरान पुलिस को घर में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और घर के भीतर मिले सुरागों के आधार पर पूछताछ कड़ी की गई। अंततः आरोपी टूट गया और पूरी वारदात कबूल कर ली।
पुलिस के मुताबिक, NEET परीक्षा को लेकर पिता-पुत्र के बीच विवाद चल रहा था। इसी तनाव के चलते आरोपी ने हत्या की योजना बनाई। 20 फरवरी की तड़के राइफल से गोली मारकर पिता की हत्या कर दी।
इसके बाद उसने शव को ठिकाने लगाने के लिए बेहद क्रूर तरीका अपनाया। दो चाकू और दो आरी से शव के अंग काटे। औजारों को ट्रांसपोर्ट नगर रेलवे ट्रैक के पास कूड़े में फेंक दिया। हत्या में प्रयुक्त राइफल और तारपीन तेल भी अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए।
पुलिस के खुलासे के अनुसार:
हाथ-पैर काटकर 21 किमी दूर नादरगंज के पास नहर किनारे फेंके गए।
धड़ को नीले ड्रम में घर में छिपाया गया।
खून सनी चादर को अनौरा जंगल में जलाया गया।
झूठी गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
इन सभी स्थानों से पुलिस ने साक्ष्य बरामद किए हैं।
जब पुलिस आरोपी अक्षत को मीडिया के सामने लाई, तो उसने पहले चुप्पी साधे रखी। बार-बार पूछे जाने पर उसने धीमे स्वर में कहा—“सॉरी, मुझसे गलती हो गई।”
इसके बाद उसे मेडिकल के लिए ले जाया गया और फिर अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया।
मानवेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार भैंसाकुंड घाट बैकुंठ धाम पर किया गया। पोस्टमार्टम हाउस से पन्नी में लिपटा शव लाया गया। शव से कवर नहीं हटाया गया; ऊपर से ही अंतिम संस्कार की रस्में निभाई गईं।
मुखाग्नि उनके छोटे भाई दरोगा अरविंद सिंह के बेटे कृत्य सिंह ने दी। इस दौरान परिवार में मातम पसरा रहा। मृतक के भाई अरविंद सिंह फूट-फूटकर रोते दिखे। पिता सुरेंद्र पाल सिंह चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण श्मशान नहीं पहुंच सके।
रिश्तेदारों और पड़ोसियों की भीड़ उमड़ पड़ी। छतों से महिलाएं शवयात्रा को देखती रहीं और रोती रहीं।
NEET विवाद के बाद लाइसेंसी राइफल से हत्या।
शव के अंग काटकर 21 किमी दूर फेंके।
चाकू और आरी से शव के टुकड़े किए।
खून सनी चादर जंगल में जलाई।
गुमशुदगी की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई।
घटना के बाद इलाके में दहशत और अविश्वास का माहौल है। पड़ोसियों का कहना है कि पिता-पुत्र के बीच विवाद की जानकारी थी, लेकिन इतना भयावह अंजाम होगा, इसकी कल्पना नहीं की थी।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पारिवारिक संबंधों के टूटने और मानसिक तनाव की भयावह परिणति भी माना जा रहा है।
आरोपी के खिलाफ हत्या (IPC 302), सबूत मिटाने (IPC 201) समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है। अदालत में पुलिस रिमांड और आगे की जांच के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा।
यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
लखनऊ में पिता की हत्या का यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है। एक पारिवारिक विवाद कैसे भयावह अपराध में बदल गया, यह घटना उसी का उदाहरण है। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई कर खुलासा कर दिया, लेकिन इस त्रासदी ने एक परिवार को हमेशा के लिए बिखेर दिया।
अब न्यायिक प्रक्रिया तय करेगी कि आरोपी को क्या सजा मिलती है। फिलहाल शहर में इस घटना को लेकर गहरी संवेदना और आक्रोश है।
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