प्रदर्शन का केंद्र रहा शहर का प्रमुख स्थल Shaheed Smarak, जहां दोपहर से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित होने लगे थे। एससी, एसटी और ओबीसी समाज के अधिकारों और यूसीसी के समर्थन में यह आयोजन किया गया।
दोपहर करीब 12 बजे भामाशाह चेतराम बैरवा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने शहीद स्मारक पर धरना शुरू किया। हाथों में भीम आर्मी के झंडे, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीरें और संविधान की प्रतियां लेकर कार्यकर्ता यूसीसी लागू करने की मांग कर रहे थे।
धरने के दौरान “समानता का अधिकार” और “सभी के लिए एक कानून” जैसे नारे गूंजते रहे। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सामाजिक व्यवस्था में वंचित वर्गों को लंबे समय से भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है, और यूसीसी से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।
शाम के समय प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस प्रशासन पहले से सतर्क था और शहीद स्मारक के पास बैरिकेड्स लगाकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
जब कार्यकर्ता आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए और संगठन का झंडा लहराने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई, हालांकि कोई गंभीर चोट या बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
चेतराम बैरवा ने अपने संबोधन में कहा कि यूसीसी के समर्थन में यह महा-आंदोलन इसलिए किया जा रहा है क्योंकि यह कानून समाज में समानता और न्याय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग “मनुवादी सोच” के कारण इस बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि उनका दावा है कि यह कानून एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न समाजों के लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि समर्थन बढ़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि अदालत के निर्देशों के बाद सरकार यूसीसी बिल लेकर आई थी, लेकिन व्यापक विरोध के चलते इस पर रोक लग गई।
गौरतलब है कि Supreme Court of India ने 29 जनवरी को यूसीसी से जुड़े नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि अंतिम निर्णय तक वर्ष 2012 के नियम लागू रहेंगे।
कोर्ट ने प्रारंभिक टिप्पणी में यह भी कहा था कि नए नियमों में कुछ अस्पष्टताएं हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ बिंदुओं पर विस्तृत जांच की आवश्यकता भी जताई गई थी।
भीम सेना नेताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेकर यूसीसी को लागू करेंगे।
यूसीसी का मुद्दा केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है।
एक ओर इसे समानता और एकरूपता की दिशा में कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न समुदायों और संगठनों द्वारा इसे लेकर आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं।
जयपुर में हुए इस समर्थन प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि राज्य में यूसीसी को लेकर विचारधारात्मक विभाजन मौजूद है।
पुलिस प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पर्याप्त बल तैनात किया था। बैरिकेडिंग, ट्रैफिक डायवर्जन और भीड़ नियंत्रण के उपाय किए गए।
हालांकि झड़प की घटना के बाद कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी को भी बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान भीम सेना नेताओं ने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे यूसीसी के मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से न देखें, बल्कि सामाजिक समानता के दृष्टिकोण से समझें।
उन्होंने कहा कि यदि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होता है, तो इससे भेदभाव कम होगा और न्याय की स्थापना होगी।
नेताओं ने विशेष रूप से स्वर्ण जाति समाज से बड़े दिल से सोचने और सामाजिक सुधार की दिशा में सहयोग करने की अपील की।
यूसीसी को लेकर प्रदेश में समर्थन और विरोध दोनों जारी हैं। अदालत की रोक के बाद फिलहाल नए नियम लागू नहीं हो पाए हैं, लेकिन बहस जारी है।
जयपुर में हुए इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूसीसी पर अंतिम निर्णय का असर केवल कानूनी ढांचे पर ही नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों पर भी पड़ेगा।
राजधानी Jaipur में यूसीसी के समर्थन में भीम सेना द्वारा किया गया प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि समान नागरिक संहिता को लेकर प्रदेश में बहस तेज हो चुकी है।
शहीद स्मारक से मुख्यमंत्री आवास तक कूच की कोशिश और पुलिस के साथ झड़प ने इस आंदोलन को और अधिक सुर्खियों में ला दिया है।
अब सबकी नजर सरकार और Supreme Court of India के अगले कदम पर है। अंतिम निर्णय जो भी हो, यह स्पष्ट है कि यूसीसी का मुद्दा राज्य की राजनीति और समाज दोनों पर गहरा प्रभाव डालेगा।
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