राजस्थान: के दौसा जिले में बुधवार को UGC के प्रस्तावित विनियम-2026 के विरोध में बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। जिला मुख्यालय पर निकाली गई आक्रोश रैली उस समय उग्र हो गई, जब प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के सामने बैरिकेडिंग तोड़कर जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे की ओर बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और युवाओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।
प्रदर्शन का केंद्र दौसा कलेक्ट्रेट परिसर रहा, जहां भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
प्रदर्शन की शुरुआत दोपहर करीब 12 बजे सहजनाथ महादेव मंदिर से हुई। बड़ी संख्या में युवा सिर पर काली पट्टियां बांधकर और हाथों में तख्तियां लेकर निकले। इन तख्तियों पर ‘UGC रोल बैक’ और केंद्र सरकार विरोधी नारे लिखे हुए थे।
रैली शहर के मुख्य मार्गों से होती हुई दौसा कलेक्ट्रेट पहुंची। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि UGC के नए विनियम छात्रों के हित में नहीं हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क था। कलेक्ट्रेट गेट पर बैरिकेडिंग की गई थी। डिप्टी एसपी धर्मेंद्र शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर रोक दिया।
कुछ देर तक नारेबाजी चलती रही। प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश की मांग कर रहे थे, जबकि पुलिस शांति बनाए रखने की अपील कर रही थी।
रैली के दौरान गांधी तिराहे पर माहौल और गर्म हो गया। कुछ युवाओं ने भाजपा के झंडों में आग लगा दी और 16 नेताओं के पुतले दहन किए। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और किसी बड़े टकराव को टालने का प्रयास किया।
झंडा दहन और पुतला फूंकने के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कई युवाओं ने आरोप लगाया कि बिना व्यापक चर्चा के नियम लागू किए जा रहे हैं, जिससे छात्रों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब दर्जनों युवक कलेक्ट्रेट से आगे बढ़कर जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे की ओर चल पड़े। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ युवा बैरिकेडिंग पार कर हाईवे तक पहुंच गए।
कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए युवाओं को हाईवे से हटाया और ट्रैफिक सुचारू कराया। करीब 10-15 मिनट तक स्थिति तनावपूर्ण रही, लेकिन बाद में नियंत्रण में आ गई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि UGC विनियम-2026 को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना था कि ये नियम संविधान की समानता की भावना के खिलाफ हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि फर्जी शिकायतों के जरिए निर्दोष छात्रों के प्रताड़ित होने की आशंका है।
करीब 30 मिनट तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम संजू मीणा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विनियम-2026 को वापस लेने की मांग की गई।
सभा में करणी सेवा की राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना, पूर्व मंत्री शैलेंद्र जोशी और ब्राह्मण समाज के बाबूलाल टीलावाला सहित कई नेताओं ने संबोधन किया। सभी वक्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग की।
हाईवे जाम की कोशिश और धक्का-मुक्की के बाद स्थिति बिगड़ने की आशंका थी, लेकिन प्रशासन की समझाइश से मामला शांत हो गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की।
एक युवक को धक्का लगने पर कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर विवाद को बढ़ने से रोका।
दौसा शहर में यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बना रहा। सोशल मीडिया पर भी वीडियो और तस्वीरें वायरल होती रहीं। कुछ लोगों ने प्रदर्शनकारियों के तरीके पर सवाल उठाए, तो कुछ ने छात्रों के मुद्दों को गंभीर बताते हुए समर्थन जताया।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शन की पूर्व सूचना थी, इसलिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी प्रकार की बड़ी क्षति नहीं हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। संभव है कि आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी इसी तरह के प्रदर्शन देखने को मिलें।
UGC विनियम-2026 को लेकर बहस अब सड़क से लेकर प्रशासनिक स्तर तक पहुंच चुकी है। छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी अहम हो सकती है।
दौसा कलेक्ट्रेट के सामने हुआ यह प्रदर्शन केवल एक स्थानीय विरोध नहीं था, बल्कि यह शिक्षा नीति को लेकर बढ़ती असंतोष की अभिव्यक्ति भी था। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की ने हालात की गंभीरता को उजागर किया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
प्रशासन और प्रदर्शनकारियों—दोनों के लिए यह जरूरी है कि संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए, ताकि कानून-व्यवस्था और छात्रों के हित दोनों सुरक्षित रह सकें।
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