राजस्थान: से एक बार फिर चर्चित मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने आसाराम की अंतरिम जमानत अवधि को बढ़ाते हुए 25 मई 2026 तक कर दिया है। पहले यह अवधि 6 मई को समाप्त होने वाली थी, लेकिन अदालत ने मेडिकल आधार पर राहत देते हुए इसे आगे बढ़ा दिया।
यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने आसाराम की ओर से दायर उस प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की, जिसमें उनकी जमानत अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। अदालत में पेश दलीलों के आधार पर यह माना गया कि उनका इलाज अभी जारी है, इसलिए जमानत बढ़ाना उचित होगा।
आसाराम की तरफ से उनके अधिवक्ता यशपाल राजपुरोहित ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हाईकोर्ट ने उनकी अपील पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। ऐसे में जब तक अंतिम निर्णय नहीं आता और इलाज जारी है, तब तक जमानत अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि आसाराम को इससे पहले भी मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मिल चुकी है। 29 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने उन्हें पहली बार जमानत दी थी। उस समय अदालत ने उनकी सजा को अस्थायी रूप से स्थगित करते हुए छह महीने की राहत प्रदान की थी।
इस मामले की पृष्ठभूमि काफी पुरानी और गंभीर है। आसाराम को नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अप्रैल 2018 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वे जेल में सजा काट रहे थे। लगभग 12 साल की कैद के बाद उन्हें पहली बार 7 जनवरी 2025 को मेडिकल कारणों से अंतरिम जमानत मिली थी।
हालांकि, जमानत समाप्त होने पर उन्होंने 30 अगस्त 2025 को आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद उन्होंने फिर से मेडिकल आधार पर राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके चलते उन्हें अक्टूबर 2025 में दोबारा जमानत मिली थी।
अब एक बार फिर उनकी जमानत अवधि बढ़ाई गई है, जिससे यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल ग्राउंड पर जमानत देना अदालत का विवेकाधिकार होता है, जिसमें आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति और इलाज की आवश्यकता को प्राथमिकता दी जाती है।
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल दीपक चौधरी ने दलीलें पेश की थीं, जबकि पीड़िता की ओर से अधिवक्ता पीसी सोलंकी ने पक्ष रखा था। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने संतुलित निर्णय लेते हुए जमानत अवधि बढ़ाने का आदेश दिया।
यह भी उल्लेखनीय है कि अदालत ने इस दौरान किसी भी तरह की स्थायी राहत नहीं दी है, बल्कि केवल अंतरिम जमानत को मेडिकल आधार पर आगे बढ़ाया है। इसका मतलब यह है कि मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें अगली सुनवाई और संभावित निर्णय पर टिकी हैं। 25 मई तक मिली इस राहत के दौरान आसाराम का इलाज जारी रहेगा और उसके बाद अदालत स्थिति की समीक्षा कर सकती है।
आसाराम को मिली यह राहत अस्थायी है और केवल मेडिकल आधार पर दी गई है। अदालत ने साफ किया है कि यह अंतिम निर्णय नहीं है। अब आगे की सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही उनके भविष्य का फैसला तय होगा।
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