Punjab: की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पर संकट के बादल मंडराने के दावे ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। गुरदासपुर से कांग्रेस सांसद Sukhjinder Singh Randhawa ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि आने वाले समय में राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है।
चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में रंधावा ने कहा कि AAP सरकार अंदरूनी संकट से जूझ रही है। उनके अनुसार, पार्टी के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं। यदि यह स्थिति आगे बढ़ती है, तो सरकार गिर सकती है और संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।
रंधावा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब हाल ही में AAP के कुछ राज्यसभा सांसदों के भाजपा से नजदीकियों की चर्चा ने राजनीतिक तापमान पहले ही बढ़ा रखा है।
रंधावा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई नेता पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से खुश नहीं हैं। यही कारण है कि वे दूसरे राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।
हालांकि, AAP की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य होने का दावा किया जा रहा है।

रंधावा ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस के किसी भी सांसद या विधायक के भाजपा में जाने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एकजुट है और पार्टी का कोई भी नेता दल बदलने वाला नहीं है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री Charanjit Singh Channi का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भाजपा में जाने की अफवाहें भी बेबुनियाद हैं।
AAP के कुछ नेताओं को ‘गद्दार’ कहे जाने पर रंधावा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—“गद्दारों ने गद्दारों से ही गद्दारी की है।” उनका इशारा उन नेताओं की ओर था, जो पहले अन्य दलों में थे और अब AAP में शामिल होकर सत्ता का हिस्सा बने हुए हैं।
यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं।
रंधावा ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने Gaurav Yadav के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि पंजाब में अपराध और नशे की समस्या फिर से बढ़ती नजर आ रही है।
उन्होंने हाल के घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि रेल ट्रैक पर धमाके और गैंगस्टर गतिविधियों में वृद्धि इस बात का संकेत है कि स्थिति नियंत्रण में नहीं है।
पंजाब सरकार द्वारा बुलाए गए विधानसभा सत्र पर भी रंधावा ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह सत्र मजदूरों के हितों की आड़ में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। उनके अनुसार, सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की रणनीति अपना रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना तभी बनती है, जब सरकार बहुमत खो दे या संवैधानिक तंत्र पूरी तरह विफल हो जाए। फिलहाल AAP के पास बहुमत है, लेकिन यदि विधायकों का टूटना शुरू होता है, तो स्थिति बदल सकती है।
पंजाब की राजनीति इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। एक ओर विपक्ष सरकार पर संकट के दावे कर रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इन आरोपों को खारिज कर रहा है। सच्चाई क्या है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। लेकिन इतना तय है कि राज्य में सियासी हलचल अभी और तेज होने वाली है।
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