नई दिल्ली: में आयोजित एक अहम सुरक्षा सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कई बड़े और सख्त बयान दिए, जिससे एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत ने इस सैन्य अभियान को किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी शर्तों और रणनीति के तहत रोका था।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने उन ठिकानों को सटीक तरीके से निशाना बनाया, जहां से भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत उस समय किसी भी लंबे युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार था और सैन्य क्षमता में कोई कमी नहीं थी।
उनका बयान यह संकेत देता है कि भारत अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति अपनाने में भी सक्षम है। उन्होंने कहा कि यह नया भारत है, जो आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम करता है।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि जहां भारत तकनीक, विकास और वैश्विक सहयोग के लिए जाना जाता है, वहीं पाकिस्तान की पहचान आतंकवाद से जुड़ चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद केवल हथियारों या हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा के रूप में फैलता है। इसलिए इसे जड़ से खत्म करना जरूरी है—चाहे वह ऑपरेशनल स्तर पर हो या वैचारिक स्तर पर।
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव आया है। अब देश केवल कूटनीतिक बयान देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई भी करता है।
उन्होंने कहा कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी से डरने वाला नहीं है और देश की सैन्य ताकत लगातार मजबूत हो रही है। जरूरत पड़ने पर इसे और तेज गति से बढ़ाया जा सकता है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ मई 2025 में शुरू किया गया था। इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में स्थित कई आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर सामने आई थी।
इसके जवाब में पाकिस्तान की ओर से ड्रोन हमले और गोलीबारी की घटनाएं सामने आईं, लेकिन भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। बाद में 10 मई को दोनों देशों के डीजीएमओ (DGMO) के बीच बातचीत के बाद संघर्षविराम पर सहमति बनी।
विशेषज्ञों के अनुसार, राजनाथ सिंह का यह बयान केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
भारत की यह नीति आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को भी मजबूत कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब कई देश आतंकवाद से जूझ रहे हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर रक्षा मंत्री का बयान यह साफ करता है कि भारत अब अपनी सुरक्षा रणनीति में पूरी तरह आत्मनिर्भर और निर्णायक बन चुका है। पाकिस्तान को लेकर कड़ा रुख और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति आने वाले समय में भारत की वैश्विक छवि और मजबूत कर सकती है।
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