देश: में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर Election Commission of India ने सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही मॉडल आचार संहिता (Model Code of Conduct) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
आयोग ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को लाउडस्पीकर, जुलूस, रैली या सार्वजनिक सभा आयोजित करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस से अनुमति लेनी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग ने 15 मार्च 2026 को पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान किया। इनमें शामिल हैं—
West Bengal
Tamil Nadu
Kerala
Assam
Puducherry
इसके अलावा देश के छह राज्यों में उपचुनाव भी कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी क्षेत्रों में चुनावी आचार संहिता लागू हो गई है।
आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाए।
मॉडल आचार संहिता लागू होते ही सरकार और सत्ताधारी दल के लिए कई प्रतिबंध लागू हो जाते हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार—
सरकारी वाहनों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं कर सकता
सरकारी भवनों या परिसरों का उपयोग रैली या सभा के लिए नहीं कर सकता
सरकारी कर्मचारियों को चुनाव प्रचार में शामिल नहीं कर सकता
इसके अलावा सरकारी खर्च पर चलने वाले सभी प्रकार के विज्ञापनों पर भी तत्काल रोक लगा दी गई है, ताकि सत्ताधारी दल को अनुचित फायदा न मिले।
आयोग ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि सरकारी और सार्वजनिक संपत्तियों पर लगे राजनीतिक पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स को तुरंत हटाया जाए।
किसी भी निजी संपत्ति पर पोस्टर या झंडा लगाने के लिए मालिक की लिखित अनुमति अनिवार्य होगी। बिना अनुमति के पोस्टर लगाने को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
इसके अलावा किसी व्यक्ति के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन या धरना देने पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि नागरिकों की निजता और शांति बनी रहे।
आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराने के लिए चुनाव आयोग ने कई डिजिटल माध्यम उपलब्ध कराए हैं।
कोई भी नागरिक या राजनीतिक दल शिकायत दर्ज कराने के लिए—
1950 हेल्पलाइन नंबर
या cVIGIL ऐप
का इस्तेमाल कर सकता है।
C-Vigil ऐप के जरिए लोग मौके की फोटो या वीडियो अपलोड कर सकते हैं। शिकायत मिलते ही चुनाव आयोग की टीम तुरंत जांच और कार्रवाई करती है।
चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए आयोग ने निगरानी के विशेष इंतजाम किए हैं।
पूरे चुनावी राज्यों में—
5173 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड
5200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमें
तैनात की गई हैं। इन टीमों का काम चुनाव प्रचार, पैसे के वितरण, शराब की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखना है।
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी राजनीतिक दबाव में आए बिना निष्पक्ष तरीके से काम करें।
चुनाव आयोग ने रैलियों और सभाओं की अनुमति के लिए एक ऑनलाइन व्यवस्था भी शुरू की है। इसके लिए SUVIDHA Portal का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस पोर्टल के जरिए राजनीतिक दल—
रैली
जनसभा
जुलूस
हेलिपैड
मैदान
के उपयोग के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आवंटन “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी दल को अनुचित फायदा न मिले।
चुनाव आयोग का कहना है कि इन सभी नियमों का उद्देश्य सिर्फ एक है—शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना।
आयोग ने प्रशासन और राजनीतिक दलों दोनों से अपील की है कि वे लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखें और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहें।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही चुनावी माहौल गर्म हो गया है। लेकिन चुनाव आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रैलियों, जुलूसों और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए अनुमति अनिवार्य होने से चुनावी प्रचार अधिक व्यवस्थित और नियंत्रित तरीके से होने की उम्मीद है।
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