तेलंगाना: में मुस्लिम आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर तेलंगाना सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या वे पूरे तेलंगाना के मुख्यमंत्री हैं या सिर्फ मुसलमानों के मुख्यमंत्री।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस सरकार वोट बैंक की राजनीति के लिए मुस्लिम समुदाय को विशेष सुविधाएं देने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, यह विवाद उस समय बढ़ा जब हैदराबाद में आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि यह सरकार उनकी अपनी सरकार है और वे उनके “भाई” हैं।
यह कार्यक्रम Hyderabad के LB Stadium में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने रोजेदारों से कहा कि सरकार राज्य के विकास के लिए सभी के सहयोग और दुआ की उम्मीद करती है।
रेवंत रेड्डी ने कहा,
“यह सरकार आपकी है। मैं आपका भाई हूं। हम सब मिलकर तेलंगाना राज्य को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे। इस सरकार के लिए आपकी दुआ बहुत जरूरी है।”
मुख्यमंत्री के इस बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता शाहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार संविधान की बात करती है लेकिन व्यवहार में तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का रवैया यह संदेश देता है कि “संविधान को भूल जाओ और सिर्फ भाईजान पर ध्यान दो।”
पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अब “वोट बैंक की राजनीति” के तहत मुस्लिम समुदाय को विशेष लाभ देने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी ने मुख्यमंत्री पर मुस्लिम आरक्षण को लेकर भी निशाना साधा है। दरअसल तेलंगाना सरकार ने राज्य में मुस्लिम समुदाय के कुछ समूहों को दिए जा रहे 4 प्रतिशत आरक्षण को जारी रखने का वादा किया है।
फिलहाल यह आरक्षण BC-E श्रेणी के तहत 14 मुस्लिम समुदायों को दिया जा रहा है। यह मामला फिलहाल Supreme Court of India में विचाराधीन है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया गया है।
बीजेपी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
पूनावाला ने कहा कि जो लोग डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों की बात करते हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या अंबेडकर ने धार्मिक आधार पर आरक्षण की वकालत की थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तेलंगाना सरकार किसानों, युवाओं और महिलाओं से किए गए वादों को पूरा करने की बजाय तुष्टिकरण की राजनीति में लगी हुई है।
हालांकि कांग्रेस और तेलंगाना सरकार का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के कुछ समूह सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हैं, इसलिए उन्हें पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण दिया गया है।
सरकार का दावा है कि यह आरक्षण पूरी तरह से संवैधानिक प्रक्रिया और सामाजिक-आर्थिक सर्वे के आधार पर दिया गया है।
राज्य सरकार अब जातीय और सामाजिक सर्वे के डेटा के आधार पर इस आरक्षण को कानूनी रूप देने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में तेलंगाना की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। बीजेपी इस मुद्दे को तुष्टिकरण की राजनीति बताते हुए कांग्रेस पर लगातार हमला कर रही है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय का हिस्सा बता रही है।
ऐसे में यह विवाद आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।
तेलंगाना में मुस्लिम आरक्षण को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। बीजेपी इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रही है, जबकि राज्य सरकार इसे सामाजिक न्याय का कदम बता रही है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले का फैसला भविष्य में राज्य की राजनीति और आरक्षण नीति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
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