विदेश: से एमबीबीएस की डिग्री लेकर भारत लौटे हजारों छात्रों के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। National Medical Commission (NMC) ने स्पष्ट कर दिया है कि कोरोना महामारी के दौरान जिन विदेशी मेडिकल छात्रों ने अपनी पढ़ाई का कोई हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से किया है, उन्हें अब उतनी ही अवधि की ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।
यदि छात्र ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए स्थायी रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगा।
इस फैसले के बाद देशभर में विदेशी मेडिकल स्नातकों के बीच चिंता बढ़ गई है और कई छात्र इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।
NMC के सचिव Dr. Raghav Langer की ओर से सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की स्टेट मेडिकल काउंसिल को इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
6 मार्च 2025 को जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कोरोना काल के दौरान की गई ऑनलाइन पढ़ाई को तभी मान्यता दी जाएगी, जब छात्र उतनी ही अवधि की ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करेंगे।
यह नियम खास तौर पर 2020 और 2021 बैच के विदेशी मेडिकल छात्रों (FMG) पर लागू होगा।
NMC के अनुसार कोरोना महामारी के समय कई विदेशी मेडिकल कॉलेजों ने छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई थी।
लेकिन मेडिकल शिक्षा में क्लिनिकल ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल अनुभव बेहद जरूरी होता है। इसलिए आयोग ने तय किया है कि जितने समय तक छात्र ने ऑनलाइन क्लास की है, उतने ही समय तक उन्हें ऑफलाइन ऑनसाइट ट्रेनिंग और क्लास करनी होगी।
आयोग ने यह भी कहा है कि यदि किसी छात्र ने एक शैक्षणिक वर्ष ऑनलाइन पढ़ाई की है तो उसकी भरपाई ऑफलाइन ट्रेनिंग के जरिए करनी होगी। बिना ऐसा किए उस डिग्री को भारत में मान्यता नहीं मिलेगी।

NMC के इस फैसले के बाद विदेश से एमबीबीएस कर चुके छात्रों में नाराजगी देखी जा रही है।
सोमवार को कई छात्र New Delhi स्थित NMC मुख्यालय पर एकत्र हुए और अधिकारियों से इस नियम में राहत देने की मांग की।
विदेश से पढ़ाई कर लौटे छात्र इस फैसले को अनुचित बता रहे हैं और नियमों में छूट देने की मांग कर रहे हैं।
कजाकिस्तान के अल्माटी शहर से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आई जयपुर की छात्रा Dr. Kiran ने कहा कि जब भारत में कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई को मान्यता दी गई थी, तो विदेश में की गई ऑनलाइन पढ़ाई को क्यों अस्वीकार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस फैसले से हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है, इसलिए NMC को इस पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
NMC के अनुसार कुछ विदेशी मेडिकल संस्थान बिना वास्तविक ऑफलाइन ट्रेनिंग के ही छात्रों को “कम्पेनसेशन सर्टिफिकेट” जारी कर देते हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे प्रमाण पत्र नियमों के अनुरूप नहीं माने जाएंगे और इनके आधार पर प्राप्त डिग्री भारत में मान्य नहीं होगी।
इसलिए छात्रों को वास्तविक ऑफलाइन क्लिनिकल ट्रेनिंग और थ्योरी क्लास पूरी करना जरूरी होगा।
विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए कुछ अनिवार्य प्रक्रियाओं से गुजरना होता है।
सबसे पहले उन्हें Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) या स्क्रीनिंग टेस्ट पास करना होता है।
इसके बाद एक वर्ष की अनिवार्य Compulsory Rotatory Medical Internship (CRMI) पूरी करनी होती है।
इन दोनों चरणों के बाद ही संबंधित राज्य की मेडिकल काउंसिल स्थायी रजिस्ट्रेशन जारी करती है।
इस बीच Rajasthan Medical Council ने भी 12 मार्च 2026 को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
इन आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि NMC की गाइडलाइन के अनुसार ही विदेशी मेडिकल स्नातकों को स्थायी रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा।
यदि किसी छात्र ने ऑनलाइन पढ़ाई के बाद ऑफलाइन ट्रेनिंग का प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया, तो उसे रजिस्ट्रेशन नहीं दिया जाएगा।
विदेश से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए NMC का नया नियम बड़ी चुनौती बन गया है। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों को अब उतनी ही अवधि की ऑफलाइन क्लास और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। इसके बिना भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए स्थायी रजिस्ट्रेशन नहीं मिलेगा। इस फैसले के बाद छात्रों में असंतोष बढ़ गया है और वे नियमों में राहत की मांग कर रहे हैं।
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