भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले प्रत्येक नागरिक का मैन-टू-मैन डिजिटल सर्वे किया जाएगा। पुलिस और प्रशासनिक टीमें घर-घर जाकर स्थानीय निवासियों की पहचान और डेटा का सत्यापन करेंगी, ताकि क्षेत्र में रह रहे नागरिकों की सटीक शिनाख्त हो सके और संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
इस डिजिटल व्यवस्था के तहत हर परिवार का एक यूनिक डिजिटल कार्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी सदस्यों की पूरी जानकारी दर्ज होगी। इस कार्ड को आधार से लिंक किया जाएगा, जिससे पहचान और डेटा का पूरी तरह एकीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके माध्यम से सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड या पृष्ठभूमि एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार का मानना है कि सीमावर्ती इलाकों में अक्सर बाहरी लोगों के श्रमिक या अन्य पहचान के तहत छिपे होने की आशंका रहती है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ता है। ऐसे में यह डिजिटल सर्वे संदिग्ध तत्वों की पहचान और निगरानी में मदद करेगा।
इससे पहले सीमावर्ती क्षेत्रों में पहचान के लिए कागजी दस्तावेजों की व्यवस्था लागू थी, जो समय के साथ समाप्त हो गई। अब बदलते सुरक्षा परिदृश्य, ड्रोन के जरिए तस्करी, हथियारों और नशीले पदार्थों की आवाजाही तथा जासूसी जैसे खतरों को देखते हुए इस प्रणाली को डिजिटल रूप में लागू किया जा रहा है।
इस योजना के लागू होने के बाद अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान आसान होने और सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।
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