राजस्थान सरकार ने भारत सरकार की पेंशन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण की पहल को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में पेंशन अदालत की शुरुआत की है। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंशन से जुड़े मामलों का अधिकतम 30 दिन के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और अनावश्यक देरी से बचा जाए।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राजस्थान सरकार पेंशनरों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार काम कर रही है। पेंशनरों को अपने मामलों के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रभावी और समयबद्ध व्यवस्था विकसित की जा रही है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेंशन संबंधी मामलों को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई की जाए। लंबित प्रकरणों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी को गंभीरता से लेने के निर्देश भी दिए गए।
मुख्य सचिव ने पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) के डिजिटाइजेशन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिकारियों को PPO से जुड़े पुराने रिकॉर्ड के डिजिटाइजेशन का काम तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।
अधिकारियों ने बताया कि PPO डिजिटाइजेशन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पुराने दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और भविष्य में पेंशन से जुड़े मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी।
मुख्य सचिव ने कहा कि पेंशन अदालत केवल शिकायतें सुनने का मंच नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह पेंशनरों की समस्याओं का मौके पर समाधान और लंबित प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था बने।
उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को पेंशनरों की समस्याओं पर संवेदनशीलता से कार्रवाई करने और मामलों का जल्द समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
राजस्थान सरकार की ओर से पेंशन प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए यह पहल की गई है। इससे लंबित मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने और पेंशनरों को राहत देने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
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