हालिया नगर निगम चुनाव के बाद भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी महापौर चुनी गई हैं। महापौर चुनाव में उन्हें 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले। इसके बाद गोस्वामी ने पदभार ग्रहण किया।
समारोह में हरिकृष्ण बिरला ने कहा कि जनप्रतिनिधि का पद जनता की सेवा के लिए है, न कि गाड़ियों पर पद की पट्टी लगाकर उसका प्रदर्शन करने या लोगों से दूरी बनाने के लिए। उन्होंने पार्षदों से अपने-अपने वार्ड में ईमानदारी के साथ काम करने और जनता की समस्याओं का समाधान कराने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पार्षदों का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि वार्ड के लोगों को अपनी समस्या लेकर उनके पास आने में किसी तरह की झिझक नहीं हो। जनता को अपने पार्षद से शिकायत का मौका नहीं मिलना चाहिए।
हरिकृष्ण बिरला ने कहा कि अगर वार्ड में घूमने और लोगों से मिलने के लिए वाहन की जरूरत है तो लोन लेकर कार खरीदी जा सकती है, लेकिन पार्षद को अपने वार्ड में जाकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न तो पार्षद के दरवाजे जनता के लिए बंद होने चाहिए और न ही वार्ड के लोगों के घरों के दरवाजे पार्षद के लिए बंद होने चाहिए।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करने की बात कही कि उनके काम और व्यवहार से जनता उनसे जुड़ी रहे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि पार्षद अपने वार्ड में जाए और नाराजगी के कारण लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लें।
हरिकृष्ण बिरला ने महापौर अनुसुईया गोस्वामी से भी कहा कि वे अपनी पहचान काम और व्यवहार से बनाएं। उन्होंने कहा कि गाड़ी पर महापौर की प्लेट लगी हो या न लगी हो, लोगों को काम देखकर पहचानना चाहिए कि यह महापौर की गाड़ी है।
उनका कहना था कि महापौर का काम और जनता के साथ व्यवहार ऐसी पहचान बनाए कि पद की प्लेट दिखाने की जरूरत ही न पड़े।
अनुसुईया गोस्वामी ने पदभार ग्रहण करते समय बिना भेदभाव के सभी को साथ लेकर शहर के विकास के लिए काम करने की बात कही थी।
बिरला ने चुनाव में हारने वाले प्रत्याशियों को लेकर भी पार्षदों और नगर निगम नेतृत्व से सकारात्मक रवैया रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि चुनाव में जो प्रत्याशी हार गए हैं, उनके काम भी नहीं अटकने चाहिए और उन्हें भी उचित तवज्जो मिलनी चाहिए।
उनके अनुसार नगर निगम का काम केवल निर्वाचित पार्षदों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पूरे शहर और सभी वार्डों की जरूरतों के अनुसार होना चाहिए।
समारोह में कोटा शहर की सफाई व्यवस्था और विकास का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। हरिकृष्ण बिरला ने कहा कि कोटा को सफाई के मामले में नंबर वन बनाने का लक्ष्य होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसके लिए बजट की कमी नहीं है, जरूरत केवल काम को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारने की है। उन्होंने महापौर और सभी पार्षदों से मिलकर शहर को साफ, व्यवस्थित और विकसित बनाने की दिशा में काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कोटा ऐसा शहर बने कि बाहर से आने वाला व्यक्ति यहां की व्यवस्थाओं को देखकर यहां रहना चाहे।
कोटा नगर निगम के 100 सदस्यीय बोर्ड में भाजपा ने 57 वार्ड जीते थे। महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनुसुईया गोस्वामी को 65 वोट मिले। घोषित संख्याबल और मतदान के आंकड़ों में अंतर के कारण चुनाव के बाद क्रॉस-वोटिंग की चर्चा भी सामने आई, हालांकि गुप्त मतदान के कारण यह निर्धारित नहीं किया जा सकता कि किस पार्षद ने किसे वोट दिया।
पृष्ठभूमि: हरिकृष्ण बिरला कोटा के सहकारी क्षेत्र से जुड़े हैं और कोटा जिला उपभोक्ता होलसेल भंडार के अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता और कोटा की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी उल्लेखित किया गया है।
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