राजस्थान। राज्य के कई जिलों में बारिश और ओले गिरने के बाद मौसम विशेषज्ञों ने मानसून की हालिया अपडेट दी है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इस बार अल नीनो के असर से मानसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। सामान्यतः मानसून मध्य जून तक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पहुंच जाता है और 8 जुलाई तक राजस्थान समेत पूरे देश में फैल जाता है। हालांकि इस बार इसके देरी से आने की संभावना जताई जा रही है। राजस्थान की खरीफ फसलें काफी हद तक बारिश पर निर्भर हैं, ऐसे में मानसून में देरी कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।
बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई तथा सड़कों पर पानी बहने लगा। शहर में चल रही नालों की सफाई के दौरान निकाला गया पानी भी बारिश के पानी के साथ वापस नालियों में बह गया। श्रीमाधोपुर, अजीतगढ़ सहित कई इलाकों में लगभग दस मिनट तक बारिश का दौर चला।
मानसून से पहले बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए सीकर के कलक्टर आशीष मोदी की अध्यक्षता में नगर परिषद कॉन्फ्रेंस हॉल में बैठक हुई। बैठक में शहरी विकास, स्वच्छता, सड़क, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई। कलक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों-नालियों की सफाई, सड़क मरम्मत और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। बैठक में युआइटी सचिव, आयुक्त, अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता और ईओ सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए सीकर, झुंझुनूं सहित कई जिलों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ और मेघगर्जना के साथ हल्की बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 30 और 31 मई को पश्चिमी विक्षोभ का असर सबसे ज्यादा रहने की संभावना है।
देर रात जिले के नीमकाथाना और पाटन क्षेत्र में एक इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि कई जगह ओलावृष्टि भी हुई। जिला मुख्यालय पर दिन के तापमान में करीब पांच डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। शाम होते-होते काली घटाएं छा गईं और तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई। बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने के बीच रात करीब आठ बजे तेज बारिश हुई।
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