नई दिल्ली/वॉशिंगटन। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने सिंधु जल संधि और भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में उस "सद्भावना और दोस्ती" की भावना को समाप्त कर दिया, जिसके आधार पर वर्ष 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी।
न्यूज़वीक में प्रकाशित अपने लेख में विनय क्वात्रा ने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला एक सीधी प्रतिक्रिया थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल उस वास्तविकता को स्वीकार करता है, जिसे पाकिस्तान के व्यवहार ने पहले ही समाप्त कर दिया था।
उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग चाहता है, तो उसे सबसे पहले अपने यहां मौजूद आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का स्पष्ट रुख है कि "आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ-साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते।"
विनय क्वात्रा ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह अपनी आंतरिक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए समय-समय पर भारत के खिलाफ युद्ध जैसी बयानबाजी करता रहा है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर सम्मेलन आयोजित करना और युद्ध की धमकियां देना इसी रणनीति का हिस्सा है।
राजदूत ने अपने लेख में यह भी उल्लेख किया कि सिंधु जल संधि की प्रस्तावना में दोनों देशों के बीच सद्भावना और मित्रता की भावना का उल्लेख है, लेकिन पाकिस्तान के लगातार व्यवहार ने उस मूल भावना को ही कमजोर कर दिया।
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