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आरयूआईडीपी के पंचम चरण में 9,500 करोड़ के विकास कार्यों की तैयारी, 84 शहरों में होगा ‘आरयूआईडीपी संवाद’

जयपुर, 3 अगस्त। राजस्थान के शहरों को आधुनिक, स्मार्ट और सस्टेनेबल बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पंचम चरण के तहत करीब 9,500 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के 84 शहरों में आधारभूत विकास कार्य किए जाएंगे। इन कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, मीडिया और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लेने के लिए 5 अगस्त से 11 अगस्त 2026 तक ‘आरयूआईडीपी संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

आरयूआईडीपी के परियोजना निदेशक हरिमोहन मीना ने बताया कि संवाद कार्यक्रमों का उद्देश्य विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा करना और स्थानीय स्तर पर सुझाव व फीडबैक प्राप्त करना है, ताकि परियोजनाओं को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य तेजी से शहरीकरण वाले शहरों और उनके सैटेलाइट नगरों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना, अनियोजित विकास को नियंत्रित करना और शहरों को अधिक रहने योग्य, पर्यावरण अनुकूल तथा सुव्यवस्थित बनाना है। इसके माध्यम से नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और स्वस्थ शहरी समुदायों के विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इन क्षेत्रों में होगा बड़ा निवेश

पंचम चरण के तहत प्रदेश के विभिन्न शहरों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनमें प्रमुख रूप से—

  • अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं शोधित जल का पुनः उपयोग
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  • शहरी यातायात सुधार
  • बाढ़ प्रबंधन एवं ड्रेनेज सिस्टम
  • कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (CCC)
  • विरासत संरक्षण एवं पर्यटन विकास
  • आवश्यकतानुसार कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP)

जैसे कार्य शामिल हैं।

एडीबी और विश्व बैंक करेंगे वित्तपोषण

परियोजना के तहत एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और विश्व बैंक दोनों वित्तीय सहयोग प्रदान करेंगे।

  • ADB की ओर से ‘राजस्थान अर्बन लिवेबिलिटी इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट (RULIP)’ के तहत लगभग 6,009 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
  • विश्व बैंक की ‘सस्टेनेबल अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ राजस्थान एक्सेलरेटेड (SUTRA)’ परियोजना के तहत करीब 3,492 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।

प्रमुख परियोजनाएं

  • 67 शहरों में 4,047 करोड़ रुपये की लागत से अपशिष्ट जल प्रबंधन और पुनर्चक्रण परियोजनाएं लागू होंगी।
  • 32 शहरों में 650 करोड़ रुपये की लागत से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।
  • जयपुर, जोधपुर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर और अजमेर सहित 7 प्रमुख शहरों में 2,022 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी।
  • 56 शहरों में 500 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ प्रबंधन और ड्रेनेज कार्य किए जाएंगे।
  • वहीं 56 शहरों में ही 701 करोड़ रुपये की लागत से कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास से जुड़े कार्य भी किए जाएंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के शहरों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। यह पहल विकसित भारत-2047 और विकसित राजस्थान-2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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