भाजपा ने वार्ड-39 से साहिब और वार्ड-26 से सलीम को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था। लेकिन दोनों ही निर्धारित समय सीमा में नामांकन दाखिल नहीं कर सके। मामला सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वार्ड-39 से भाजपा प्रत्याशी घोषित की गईं साहिब के मुताबिक, उन्हें पार्टी की ओर से टिकट मिलने की जानकारी ही नहीं थी। इसी कारण वह नामांकन दाखिल करने के लिए नहीं पहुंच सकीं।
साहिब के पिता ने भी पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि टिकट देने से पहले परिवार से किसी तरह का संपर्क या राय-मशविरा नहीं किया गया। उन्हें बेटी को भाजपा का टिकट मिलने की जानकारी मीडिया के जरिए मिली।
वार्ड-26 से भाजपा के प्रत्याशी बनाए गए सलीम को लेकर भी इसी तरह की स्थिति सामने आई। उनसे संपर्क करने के लिए उनके घर पहुंचने पर वह वहां मौजूद नहीं मिले। परिजनों ने भी बताया कि उन्हें टिकट या नामांकन से जुड़ी कोई जानकारी नहीं है।
इस तरह दोनों वार्डों में भाजपा ने प्रत्याशी घोषित तो किए, लेकिन नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
इस घटनाक्रम ने भाजपा के टिकट वितरण और चुनावी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि प्रत्याशियों के नाम तय होने के बाद क्या पार्टी पदाधिकारियों ने उन्हें इसकी सूचना दी? क्या नामांकन की अंतिम तारीख और जरूरी दस्तावेजों को लेकर प्रत्याशियों से संपर्क किया गया?
चुनाव में सिर्फ प्रत्याशी की घोषणा करना पर्याप्त नहीं होता। नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार और मतदान तक पार्टी संगठन और प्रत्याशी के बीच लगातार समन्वय जरूरी होता है।
दौसा नगर परिषद में भाजपा मजबूत तैयारी के साथ चुनाव मैदान में उतरने का दावा कर रही है। ऐसे में दो घोषित प्रत्याशियों का नामांकन दाखिल नहीं हो पाना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला है।
अब राजनीतिक चर्चा इस बात को लेकर है कि टिकट वितरण के दौरान आखिर ऐसी चूक कैसे हुई और क्या पार्टी संगठन इस मामले की समीक्षा करेगा। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सामने आया यह मामला दौसा के निकाय चुनाव में भाजपा के लिए एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
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