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राजस्थान में हजारों नेताओं पर चुनाव लड़ने का खतरा: पंचायत इलेक्शन से हो सकते हैं बाहर, 3 साल का बैन तय!

राजस्थान: में आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले हजारों नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। राज्य चुनाव आयोग के नियमों के तहत पिछले पंचायत चुनाव में अपने चुनावी खर्च का विवरण जमा नहीं करने वाले प्रत्याशियों पर अब सख्त कार्रवाई की तैयारी है। ऐसे प्रत्याशियों को आगामी पंचायत चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है और उन पर तीन साल तक का प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

प्रदेश में मार्च-अप्रैल के दौरान पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। इससे पहले राज्य चुनाव आयोग उन सभी प्रत्याशियों की सूची तैयार करवा रहा है, जिन्होंने पिछले चुनाव के बाद निर्धारित समय सीमा में खर्च का ब्योरा नहीं दिया था। आयोग जल्द ही इस संबंध में जिला कलेक्टरों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।

खर्च का ब्योरा देना अनिवार्य

चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को परिणाम घोषित होने के 15 दिनों के भीतर अपने पूरे चुनावी खर्च का विवरण आयोग को देना अनिवार्य होता है। इसमें नामांकन से लेकर चुनाव परिणाम तक का पूरा खर्च शामिल होता है और इसके समर्थन में बिल या वाउचर जमा करना भी जरूरी होता है।

राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, साल 2020 में हुए पंचायत चुनावों में बड़ी संख्या में प्रत्याशियों ने यह नियमों का पालन नहीं किया था। अनुमान है कि ऐसे प्रत्याशियों की संख्या 4 से 5 हजार से भी अधिक हो सकती है।

जिला कलेक्टरों से मांगी जाएगी सूची

साल 2020 में प्रदेश के 21 जिलों में पंचायत चुनाव कराए गए थे। इन चुनावों में 636 जिला परिषद सदस्यों और 4371 पंचायत समिति सदस्यों के पदों के लिए मतदान हुआ था। पंचायत समिति सदस्य पद के लिए 12,663 और जिला परिषद सदस्य पद के लिए 1,778 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।

आयोग अब उन प्रत्याशियों की पहचान कर रहा है जिन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भी खर्च का विवरण जमा नहीं किया। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को सूची तैयार कर आयोग को भेजने के निर्देश दिए जाएंगे। अंतिम फैसला राज्य चुनाव आयोग द्वारा लिया जाएगा कि किन प्रत्याशियों पर चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाई जाए।

3 साल की पाबंदी का है नियम

राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया है कि चुनावी खर्च का ब्योरा नहीं देने पर तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान नियमों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि आयोग इस संबंध में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगा और जिला कलेक्टरों से पूरी जानकारी ली जाएगी।

हाल ही में बढ़ाई गई खर्च सीमा

राज्य चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर 2025 को पंचायती राज चुनावों के लिए खर्च सीमा बढ़ाने की अधिसूचना जारी की थी। नए नियमों के अनुसार:

  • सरपंच अधिकतम 1 लाख रुपये

  • पंचायत समिति सदस्य 1.5 लाख रुपये

  • जिला परिषद सदस्य 3 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे

पहले यह सीमा क्रमशः 50 हजार, 75 हजार और 1.5 लाख रुपये थी। आयोग ने तीनों पदों के लिए खर्च सीमा को लगभग दोगुना कर दिया है, लेकिन साथ ही खर्च का विवरण समय पर देना अनिवार्य कर दिया गया है।


निष्कर्ष

राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले चुनाव आयोग की सख्ती हजारों नेताओं के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। यदि पिछले चुनावों में खर्च का ब्योरा नहीं देने वाले प्रत्याशियों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है, तो बड़ी संख्या में पंच, सरपंच और जिला परिषद सदस्य आगामी चुनाव से बाहर हो सकते हैं। इससे पंचायत चुनावों का राजनीतिक समीकरण भी पूरी तरह बदल सकता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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