उत्तर प्रदेश: के मथुरा-वृंदावन में शुक्रवार सुबह एक खास आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अचानक बारिश के बीच वृंदावन पहुंचीं। उनका यह दौरा न केवल आधिकारिक था, बल्कि पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ नजर आया।
सुबह करीब 7 बजे राष्ट्रपति अपने परिवार के साथ संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचीं। जैसे ही राष्ट्रपति आश्रम में दाखिल हुईं, उन्होंने हाथ जोड़कर संत को प्रणाम किया। इसके जवाब में संत प्रेमानंद महाराज ने मुस्कुराते हुए ‘राधे-राधे’ कहकर उनका स्वागत किया। यह पल बेहद भावुक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ था।
आश्रम में राष्ट्रपति और संत प्रेमानंद के बीच करीब 25 मिनट तक गहन आध्यात्मिक चर्चा हुई। इस दौरान माहौल बेहद शांत और भक्तिमय रहा। सूत्रों के अनुसार, चर्चा के दौरान राष्ट्रपति भाव-विभोर नजर आईं। बातचीत में जीवन, आध्यात्मिकता और समाज से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
इस खास मुलाकात के दौरान आश्रम परिसर में केवल राष्ट्रपति, उनके परिवार के सदस्य और संत के करीबी शिष्य ही मौजूद रहे, जिससे इस बातचीत की गोपनीयता और गंभीरता बनी रही।
इस आध्यात्मिक यात्रा में राष्ट्रपति अकेली नहीं थीं। उनके साथ उनकी बेटी इतिश्री मुर्मू, दामाद गणेश हेम्ब्रम और उनकी दोनों नातिनें आद्याश्री और नित्याश्री भी मौजूद थीं। आश्रम में उनके स्वागत के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे और परिवार के बैठने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी।
आश्रम के संतों ने राष्ट्रपति का पारंपरिक तरीके से माला और चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया। इस दौरान पूरे परिसर में भक्ति और सम्मान का माहौल देखने को मिला।
इस मुलाकात का एक खास पहलू यह भी रहा कि राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद महाराज को उनके जन्मदिन की बधाई दी। 19 मार्च को उनका 56वां जन्मदिन था। राष्ट्रपति ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। इससे पहले गुरुवार को उन्होंने रामलला मंदिर में दर्शन किए थे। इसके बाद वे शाम को मथुरा पहुंचीं और शुक्रवार सुबह वृंदावन में संत प्रेमानंद से मिलने पहुंचीं।
यह उनका मथुरा का दूसरा दौरा है। इससे पहले वे 25 सितंबर को यहां आई थीं, जब उन्होंने बांके बिहारी मंदिर में पूजा-अर्चना की थी।
संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति का अगला पड़ाव नीम करौरी बाबा के आश्रम का दौरा है। यहां भी वे पूजा-अर्चना करेंगी और संत परंपरा से जुड़े लोगों से मुलाकात करेंगी।
राष्ट्रपति का यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से उनके गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है। जिस तरह से उन्होंने साधारण भक्त की तरह आश्रम में प्रवेश किया और संत से आशीर्वाद लिया, उसने लोगों के दिलों को छू लिया।
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