बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक में अमरपाल मौर्य ने ओबीसी मोर्चा के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने तथा ओबीसी समाज की विभिन्न जातियों को पार्टी से जोड़ने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जाए। साथ ही, वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए कार्यकर्ता पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें।
अमरपाल मौर्य के जयपुर दौरे के दौरान ओबीसी मोर्चे के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ से भी मुलाकात की। इस कवायद को पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश में ओबीसी समाज के बीच संगठन की पहुंच मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
राजस्थान की राजनीति में ओबीसी वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में पंचायत चुनावों से पहले बीजेपी इस वर्ग के विभिन्न सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी की रणनीति में मूल ओबीसी समुदाय को विशेष महत्व दिए जाने की चर्चा है।
राज्य में जाट, गुर्जर, माली-सैनी, कुम्हार, यादव, बिश्नोई और आंजना सहित कई समुदाय राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। बीजेपी का प्रयास है कि इन समुदायों के बीच केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर संवाद मजबूत किया जाए।
राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी को लेकर अलग-अलग अध्ययनों और अनुमानों में भिन्नता देखने को मिलती है। विभिन्न राजनीतिक चर्चाओं और सामाजिक आकलनों में राज्य में ओबीसी की हिस्सेदारी लगभग 40 से 50 प्रतिशत या उससे अधिक तक बताई जाती रही है। हालांकि, इन अनुमानों को आधिकारिक जातिवार जनगणना के आंकड़ों के समान नहीं माना जाना चाहिए।
राज्य में ओबीसी वर्ग को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 21 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। आबादी और सामाजिक प्रतिनिधित्व के कारण यह वर्ग चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।
ओबीसी समाज के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी अपने प्रमुख ओबीसी नेताओं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को भी अहम मान रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं का उल्लेख कर कार्यकर्ताओं से समाज के बीच संवाद बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
राजस्थान में सतीश पूनिया सहित कई नेताओं को भी पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। बीजेपी की कोशिश है कि संगठन के जरिए विभिन्न समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाई जाए।
पंचायत चुनावों में स्थानीय समीकरण, उम्मीदवारों की छवि, जातीय प्रतिनिधित्व और सरकारी योजनाओं का प्रभाव अहम भूमिका निभा सकता है। ऐसे में बीजेपी का ओबीसी मोर्चा कितना प्रभावी ढंग से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाता है, यह चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अमरपाल मौर्य की जयपुर में हुई बैठक को इसी दिशा में संगठन को सक्रिय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बीजेपी की यह रणनीति राजस्थान के ग्रामीण इलाकों और पंचायत चुनावों में कितना राजनीतिक लाभ दिला पाती है।
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