योजना के तहत देश के 100 चयनित जिलों में राजस्थान के 8 जिलों को शामिल किया गया है। नागौर ने फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में 18.44 अंक हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालीन कृषि ऋण की उपलब्धता में नागौर चौथे स्थान पर रहा। कृषि उत्पादकता और बेहतर सेवा वितरण में भी जिले ने पांचवां स्थान हासिल किया है। वहीं, सिंचाई बुनियादी ढांचे में सुधार के क्षेत्र में पाली जिला देशभर में आठवें स्थान पर रहा।
योजना के तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जैसलमेर जिले में 2 हजार एकड़ में एकीकृत कीट प्रबंधन आधारित जीरे की खेती और 500 एकड़ में सौर ऊर्जा आधारित स्प्रिंकलर सिंचाई की पहल को भी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।
इस योजना के तहत 11 विभागों की 36 योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इनमें पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, पीएम-कुसुम और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना सहित कई प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य फसल उत्पादन बढ़ाने, कृषि लागत और जोखिम कम करने तथा किसानों की आय में सुधार के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। नियमित निगरानी और जिलों की मासिक रैंकिंग के जरिए योजना के क्रियान्वयन को भी मजबूत बनाया जा रहा है।
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