जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। राज्य निर्वाचन आयोग के घोषित परिणामों के अनुसार भाजपा ने कुल 4,179 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 2,273 वार्डों में जीत मिली।
इन परिणामों के बाद भाजपा ने इसे प्रदेश की जनता का बड़ा जनादेश बताया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने परिणामों को सरकार के कामकाज से जोड़ते हुए पार्टी के पक्ष में आए जनादेश के तौर पर पेश किया है। हालांकि, निकाय स्तर पर बोर्ड गठन का गणित कई जगह अभी भी निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर निर्भर करेगा।
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में भाजपा को 86 निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला है। कांग्रेस 46 निकायों में बहुमत हासिल करने में सफल रही। वहीं 177 निकाय ऐसे हैं, जहां भाजपा या कांग्रेस में से किसी भी दल को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। इन निकायों में भाजपा 96 जगह कांग्रेस से आगे है, जबकि कांग्रेस 69 निकायों में आगे है और 12 निकायों में दोनों दल बराबरी पर हैं।
यानी चुनाव परिणामों में भाजपा का वार्ड स्तर पर दबदबा जरूर दिखाई देता है, लेकिन कई नगर निकायों में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण होगा।
राजस्थान के 10 नगर निगमों में भाजपा को चार जगह स्पष्ट बहुमत मिला है। जयपुर, उदयपुर, कोटा और भीलवाड़ा में भाजपा बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई, जबकि जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस बराबरी पर रहे। भरतपुर में निर्दलीय पार्षदों ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं।
| नगर निगम | कुल वार्ड | प्रमुख स्थिति |
|---|---|---|
| जयपुर | 150 | BJP 78, कांग्रेस 53, निर्दलीय 15 |
| उदयपुर | 80 | BJP 53 — स्पष्ट बहुमत |
| भीलवाड़ा | 70 | BJP 45 — स्पष्ट बहुमत |
| कोटा | 100 | BJP 55 — स्पष्ट बहुमत |
| बीकानेर | 80 | कांग्रेस 42 — स्पष्ट बहुमत |
| अजमेर | 80 | कांग्रेस 37, BJP 32, निर्दलीय 11 |
| जोधपुर | 100 | BJP 44, कांग्रेस 44, निर्दलीय 10 |
| पाली | 65 | कांग्रेस 29, BJP 21, निर्दलीय 15 |
| अलवर | 65 | BJP 28, कांग्रेस 23, निर्दलीय 13 |
| भरतपुर | 65 | निर्दलीय 36, BJP 20, कांग्रेस 7 |
नोट: कुछ शुरुआती रिपोर्टों में अलवर और अन्य निकायों के वार्ड आंकड़ों में अंतर था; ऊपर दिए आंकड़े उपलब्ध ताजा परिणाम रिपोर्टों के अनुसार हैं।
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में भाजपा ने 78 सीटें जीती हैं। कांग्रेस के खाते में 53 और निर्दलीयों के खाते में 15 सीटें आईं। बाद में हुए पुनर्मतदान में कांग्रेस ने चार वार्ड जीते, लेकिन भाजपा की 78 सीटों की संख्या बरकरार रही।
इस तरह जयपुर में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में है।
उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा ने 53 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं भीलवाड़ा के 70 वार्डों में भाजपा को 45 सीटें मिलीं। दोनों ही नगर निगमों में भाजपा बहुमत के आंकड़े से काफी आगे रही।
जोधपुर नगर निगम चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 वार्डों में जीत मिली, जबकि 10 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं। ऐसे में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो सकती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में चुनाव परिणामों ने अलग तस्वीर पेश की। 65 सदस्यीय नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। भाजपा को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। (The New Indian Express)
राज्य की 47 नगर परिषदों में भाजपा ने 12 नगर परिषदों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। इनमें पुष्कर, बालोतरा, बांसवाड़ा, बाड़मेर, चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, डूंगरपुर, सुजानगढ़, चौमूं, जैसलमेर, राजसमंद और सवाई माधोपुर शामिल हैं।
कुछ प्रमुख नगर परिषदों में भाजपा का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
पुष्कर: 25 में से 19 वार्ड
बालोतरा: 55 में से 29 वार्ड
बांसवाड़ा: 60 में से 34 वार्ड
बाड़मेर: 55 में से 29 वार्ड
चित्तौड़गढ़: 60 में से 33 वार्ड
निम्बाहेड़ा: 45 में से 27 वार्ड
डूंगरपुर: 40 में से 24 वार्ड
सुजानगढ़: 60 में से 31 वार्ड
चौमूं: 45 में से 30 वार्ड
जैसलमेर: 45 में से 25 वार्ड
राजसमंद: 45 में से 27 वार्ड
सवाई माधोपुर: 60 में से 33 वार्ड
राज्य की 252 नगर पालिकाओं में भाजपा ने करीब 70 नगर पालिकाओं में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि कांग्रेस को 39 नगर पालिकाओं में बहुमत मिला। बाकी निकायों में निर्दलीय और अन्य दलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। (The Indian Express)
कुल घोषित परिणामों में भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 वार्ड और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते। इसके अलावा RLP, AAP, CPI(M), BSP और BAP जैसे दलों ने भी कुछ वार्डों में जीत दर्ज की।
इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा वार्डों की कुल संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, करीब 2,273 निर्दलीय पार्षदों की जीत के कारण कई निकायों में अध्यक्ष और सभापति के चुनाव में उनका समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
निकाय चुनाव के बाद अब सबसे अहम चरण महापौर, सभापति और नगर पालिका अध्यक्षों के चुनाव का है। जिन निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, वहां पार्षदों के समर्थन का गणित बोर्ड गठन तय करेगा।
यानी चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब राजनीतिक दलों का फोकस उन निकायों पर है, जहां बहुमत का आंकड़ा पूरा करने के लिए निर्दलीय या अन्य दलों के पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने निकाय चुनाव के परिणामों को पार्टी के लिए बड़ा जनादेश बताया है। वहीं भाजपा नेतृत्व की ओर से इसे सरकार के कामकाज के प्रति जनता के समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से चुनाव परिणामों और वार्ड परिसीमन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इन दावों और आरोपों को संबंधित नेताओं के बयानों के रूप में देखा जाना चाहिए।
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 में भाजपा 4,179 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है और 309 में से 86 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 46 निकायों में स्पष्ट बहुमत मिला है। वहीं 177 निकायों में किसी भी प्रमुख दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, जिससे निर्दलीय पार्षद कई जगह बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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