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Bulldozer Action: "मुझे जबरदस्ती बाहर निकाला, बच्चे घर में ही थे और अचानक चला दिया बुलडोजर", अजमेर प्रशासन पर डॉक्टर के आरोप

अजमेर : पंचशील क्षेत्र में अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई विवादों में आ गई है। इस दौरान डॉ. कुलदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि एडीए अधिकारियों ने उनके घर में रह रहे बच्चों को जबरन बाहर निकालकर बिना किसी पूर्व सूचना के घर को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के विरोध में डॉक्टर समुदाय और ब्राह्मण महासभा भी खुलकर सामने आ गई है।

कैसे शुरू हुआ मामला?

चार साल पहले नितिन दरगड़ ने 487 वर्ग मीटर का भूखंड नीलामी में खरीदा था, जिस पर उनके रिश्तेदार डॉ. कुलदीप शर्मा रह रहे थे। बाद में पता चला कि गलती से 90 वर्ग मीटर अतिरिक्त भूमि सौंप दी गई थी। जब भवन निर्माण की अनुमति के लिए आवेदन किया गया, तो एडीए ने इस गलती को सुधारते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया।

14 फरवरी को मिला था नोटिस, 17 मार्च को कार्रवाई

एडीए ने 14 फरवरी 2025 को भूखंड A-56 पर बिना स्वीकृति निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया। 14 मार्च को दरगड़ ने जवाब दाखिल किया, लेकिन एडीए संतुष्ट नहीं हुआ और 17 मार्च को अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। गुरुवार को एडीए की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची और बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त कर दिया।

डॉ. कुलदीप शर्मा के गंभीर आरोप

डॉ. कुलदीप शर्मा का कहना है कि एडीए ने बिना किसी कानूनी सूचना के जबरन उनके मकान को तोड़ दिया। उन्होंने दावा किया कि जब जेसीबी से तोड़फोड़ हो रही थी, तब उनके नाबालिग बच्चे घर के अंदर मौजूद थे। उन्हें बलपूर्वक घर से बाहर निकाला गया। इतना ही नहीं, उन्होंने एडीए अधिकारियों पर मारपीट और अभद्र व्यवहार करने का भी आरोप लगाया है।

ब्राह्मण महासभा और डॉक्टर समुदाय ने किया विरोध

इस कार्रवाई के खिलाफ राजस्थान ब्राह्मण महासभा ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग की। महासभा के अध्यक्ष पंडित सुदामा शर्मा ने इस घटना को प्रशासनिक अराजकता करार दिया। वहीं, प्राइवेट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पंकज तोषनीवाल ने ऐलान किया कि शुक्रवार को सभी निजी अस्पतालों की ओपीडी और आईपीडी बंद रहेंगी। चिकित्सक जेएलएन अस्पताल के सामने इकट्ठा होकर आगे की रणनीति तय करेंगे।

प्रशासन की सफाई

अजमेर विकास प्राधिकरण का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से कानूनी थी और पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था। एडीए अधिकारियों का कहना है कि संबंधित पक्ष को समय दिया गया था, लेकिन निर्माण अवैध होने के कारण कार्रवाई करनी पड़ी।

क्या होगा आगे?

इस विवाद के बढ़ने के बाद अब प्रशासन और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए हैं। ब्राह्मण महासभा और डॉक्टर्स एसोसिएशन के आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अब देखना होगा कि यह मामला क्या नया मोड़ लेता है।

Written By

Monika Sharma

Desk Reporter

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