अजमेर: केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वक्फ़ संशोधन बिल 2024 को लेकर अजमेर दरगाह के खादिमों के बीच भारी मतभेद सामने आया है। दरगाह के गद्दीनशीन सलमान चिश्ती और ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने बिल का समर्थन किया है, जबकि अजमेर शरीफ अंजुमन (खादिमों की मुख्य संस्था) ने इसका कड़ा विरोध किया है।
अंजुमन सैयद जादगान ने वक्फ़ संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किया और बिल का समर्थन करने वालों की निंदा की।
संस्था के सचिव सरवर चिश्ती ने कहा कि सलमान चिश्ती दरगाह प्रमुख नहीं हैं, बल्कि 5,000 खादिमों में से एक हैं।
सरवर चिश्ती ने आरोप लगाया कि सलमान चिश्ती खादिमों के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं और बिल का समर्थन कर बीजेपी और दक्षिणपंथी संगठनों का साथ दे रहे हैं।
सलमान चिश्ती ने द हिंदू में 31 मार्च को एक लेख लिखा, जिसका शीर्षक था – "वक्फ में सुधार का वक्त आ गया है"।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस लेख को शेयर करते हुए कहा कि वक्फ में सुधार जरूरी है, ताकि यह मुस्लिम समुदाय और समाज को अधिक लाभ पहुंचा सके।
आध्यात्मिक गुरु के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने भी बिल का समर्थन किया।
खादिमों की संस्था का कहना है कि सलमान चिश्ती दरगाह प्रमुख नहीं हैं, बल्कि केवल एक खादिम हैं।
सरवर चिश्ती ने कहा, "खादिम होने के नाते सलमान चिश्ती संस्था के प्रस्ताव के खिलाफ नहीं जा सकते, लेकिन उन्होंने खादिमों के नाम का दुरुपयोग किया है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया में सलमान चिश्ती खुद को दरगाह प्रमुख के रूप में पेश कर रहे हैं, जो गलत है।
अजमेर दरगाह में वक्फ संशोधन बिल को लेकर खादिमों और गद्दीनशीनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। एक तरफ सलमान चिश्ती और नसीरुद्दीन चिश्ती बिल का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ अंजुमन सैयद जादगान संस्था इसे मुसलमानों के खिलाफ बता रही है। अब देखना होगा कि इस विवाद का क्या समाधान निकलता है और क्या वक्फ संशोधन बिल को संसद से मंजूरी मिलती है।
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