राजस्थान: बागी तेवरों के लिए मशहूर किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) अब सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। कभी अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने वाले मंत्री अब पूरी ताकत से कृषि मंत्री के रूप में काम करने की बात कह रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ जो मीणा ने अपना रुख बदल लिया? क्या यह हाईकमान का दबाव है या कोई नई सियासी रणनीति? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
सरकार बनने के बाद से किरोड़ी लाल मीणा कई बार अपनी ही पार्टी और सरकार पर सवाल उठा चुके थे।
लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार और उनके भाई की उपचुनाव में हार के बाद उन्होंने खुलकर साजिश के आरोप लगाए।
जनवरी में उन्होंने विधानसभा में फोन टैपिंग का आरोप लगाकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था।
इन बयानों से नाराज पार्टी हाईकमान ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
हाल ही में कोटा में मीडिया से बातचीत के दौरान मीणा ने अपने पुराने तेवर बदलते हुए कहा, "अब पुरानी बातें मत कुरेदो, वो बीत गईं। मुझे हाईकमान से निर्देश मिला है कि काम करो, और मैं अब पूरी ताकत से कृषि मंत्री के रूप में काम करूंगा।"
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मीणा के इस बदलाव के पीछे भाजपा की सख्त अनुशासन नीति और उनका सियासी भविष्य बड़ा कारण हो सकता है।
पार्टी का साफ संदेश था कि अगर वे बगावती रुख अपनाते रहे, तो मंत्री पद खतरे में पड़ सकता है।
मीणा ने महसूस किया कि अगर वे सरकार के खिलाफ मुखर रहेंगे, तो पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि किरोड़ी लाल मीणा वास्तव में पार्टी लाइन पर आ गए हैं या फिर यह महज एक अस्थायी रणनीति है? क्या वे अगले चुनाव तक सरकार के साथ रहेंगे या फिर किसी और मौके पर फिर से बागी तेवर अपनाएंगे?
राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता, लेकिन भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मीणा कितने दिनों तक सरकार के साथ टिके रहते हैं।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.