Rajasthan News: भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों का विस्तार कर 33 नए गांवों को शामिल किया गया है। हालांकि, इस फैसले पर ग्रामीणों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ गांवों के लोग इससे खुश हैं, तो कई इसका विरोध कर रहे हैं।
भरतपुर से 5 किलोमीटर दूर स्थित मुरवारा गांव के लोग नगर निगम में शामिल होने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत में उनकी समस्याओं का समाधान आसानी से हो जाता था, लेकिन नगर निगम से जुड़ने पर नई दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।
महंगे बिजली और पानी के बिल:
ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद बिजली-पानी के बिल और यूडी टैक्स बढ़ जाएंगे, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी होगी।
नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगाने होंगे:
ग्राम पंचायत में काम आसानी से हो जाता था, लेकिन अब हर छोटी समस्या के लिए नगर निगम कार्यालय जाना पड़ेगा।
धरना-प्रदर्शन की चेतावनी:
ग्रामीणों ने सीएम और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया है।
अगर गांव को ग्राम पंचायत में यथावत नहीं रखा गया, तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
स्वायत्त शासन विभाग के आदेश पर स्थानीय प्रशासन ने परिसीमन कर वार्डों का क्षेत्र तय कर दिया है।
परिसीमन के बाद इसका प्रकाशन भी किया गया, और 17 अप्रैल तक आपत्ति मांगी गई है।
आपत्तियों की समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने गांव को ग्राम पंचायत में बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन उनकी आपत्तियों पर क्या फैसला लेता है।
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