अजमेर: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के कार्मिकों ने 27 मार्च से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था, लेकिन ठोस आश्वासन न मिलने पर उन्होंने पेन डाउन हड़ताल का निर्णय लिया। गुरुवार से शुरू हुई इस हड़ताल के चलते आयोग के कई महत्वपूर्ण कार्य ठप हो गए हैं।
हड़ताल के कारण आयोग का कामकाज प्रभावित संयुक्त संघर्ष समिति के अनुसार, आयोग में वर्ष 2025 के दौरान केवल 80 दिनों में 158 परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इतनी बड़ी संख्या में परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की आवश्यकता होगी, लेकिन वर्तमान में कार्मिकों की संख्या अपर्याप्त है। इस वजह से आयोग के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें:
इंटरव्यू प्रक्रिया
विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें
भर्ती संबंधी अभिस्तावन
विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम जारी करने की प्रक्रिया शामिल हैं।
कामकाज पर असर हड़ताल का सीधा असर आयोग के रोजमर्रा के कार्यों पर पड़ा है। कई उम्मीदवारों के इंटरव्यू और पदोन्नति से संबंधित बैठकें स्थगित हो गई हैं। इसके अलावा, विभिन्न भर्तियों के परिणाम जारी करने में देरी हो सकती है, जिससे हजारों अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। यदि यह हड़ताल लंबी चलती है, तो इससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में बाधा आएगी और भर्ती प्रक्रियाएं लंबित हो सकती हैं।
सामूहिक अवकाश की चेतावनी यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आयोग के कर्मचारियों ने सोमवार से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है। इसका मतलब यह होगा कि आयोग का पूरा प्रशासनिक कार्य ठप हो जाएगा, जिससे परीक्षाओं की तैयारियों पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकार और प्रशासन की भूमिका अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आयोग प्रशासन इस हड़ताल को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाते हैं। अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहरा सकता है। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की माँग लंबे समय से लंबित है, और यदि इसे गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आयोग के कामकाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। संघर्ष समिति ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि आयोग की कार्यप्रणाली बाधित न हो और परीक्षार्थियों को परेशानी न उठानी पड़े।
कार्मिकों की मांग और प्रशासन का रुख संघर्ष समिति के अध्यक्ष दयाकर शर्मा ने बताया कि आयोग के कर्मचारियों ने प्रशासन से कई बार 98 नए पदों के सृजन की मांग की, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कार्मिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है, और वे अपने आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बना रहे हैं।
क्या है आगे की रणनीति? संघर्ष समिति का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को मान नहीं लेती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो कार्मिक बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि यह हड़ताल लंबी चलती है, तो राजस्थान लोक सेवा आयोग की आगामी परीक्षाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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