मुंबई। भारतीय सिनेमा के 'भारत कुमार' के नाम से मशहूर मनोज कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार मुंबई के पवन हंस श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और बेटे कुणाल गोस्वामी ने उन्हें मुखाग्नि दी।
सुबह करीब 9:30 बजे, उनका पार्थिव शरीर कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल से उनके घर लाया गया। यहां अंतिम दर्शन और प्रार्थना सभा हुई। इसके बाद फूलों से सजे वाहन में उन्हें अंतिम यात्रा के लिए श्मशान घाट ले जाया गया।
मनोज कुमार के अंतिम संस्कार में बॉलीवुड के कई दिग्गज शामिल हुए। अभिनेता जायद खान ने कहा,
“वो सिर्फ एक स्टार नहीं थे, बल्कि मानवता की मिसाल थे। उन्होंने सिखाया कि दिलों में बसने के लिए कैसे जिया जाता है।”
बिंदू दारा सिंह ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा,
“उन्होंने प्यार, इज्जत, शोहरत सब कुछ कमाया और वह इस सम्मान के हकदार थे। उनकी देशभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।”
मनोज कुमार पिछले कुछ हफ्तों से बीमार चल रहे थे। बेटे कुणाल गोस्वामी ने बताया कि उन्हें 21 फरवरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और शुक्रवार को उन्होंने आखिरी सांस ली।
कुणाल ने कहा कि उनके पिता की फिल्में—‘उपकार’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’, ‘पूरब पश्चिम’—आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और आगे भी रहेंगी।
‘भारत कुमार’ का दर्जा पाने वाले मनोज कुमार ने हमेशा देशभक्ति को अपनी फिल्मों का मूल भाव बनाया। उन्होंने फिल्मों के ज़रिए राष्ट्रप्रेम को जन-जन तक पहुंचाया, और यही उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग बनाता है।
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