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भाषण में सरपंच ने खुलेआम दी हत्या की धमकी, नगरपालिका में शामिल गांवों के विरोध में हो रही थी सभा

झुंझुनूं, राजस्थान चिड़ावा नगरपालिका विस्तार को लेकर चल रहे विवाद में अडूका गांव के पूर्व सरपंच मोहनलाल शर्मा द्वारा दिया गया भड़काऊ भाषण भारी पड़ गया। भाषण के दौरान एक जाति विशेष के लोगों को खुलेआम हत्या की धमकी देने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया।


क्या था मामला?

2 अप्रैल को चिड़ावा नगरपालिका क्षेत्र में नए गांवों को शामिल करने के विरोध में बापू बाजार में प्रदर्शन और जनसभा आयोजित की गई थी। इस दौरान पूर्व सरपंच मोहनलाल शर्मा ने मंच से ऐसा बयान दे दिया, जिसने सामाजिक सौहार्द को खतरे में डाल दिया।

भाषण में उन्होंने कहा:

“जिसने भी अडूका को नगरपालिका में शामिल करने की पैरवी की है, उसका मर्डर कर देंगे... अगर कोई वोट मांगने आया तो पत्थरों से स्वागत करेंगे।”

इतना ही नहीं, उन्होंने जातिसूचक शब्दों और गालियों का प्रयोग कर एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया।


पुलिस ने तत्काल की कार्रवाई

सोशल मीडिया पर दो दिन से वायरल हो रहे वीडियो को संज्ञान में लेते हुए चिड़ावा सीआई आशाराम गुर्जर ने मोहनलाल शर्मा को BNS की धारा 170 (पूर्व में भादंस की धारा 151) के तहत शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार किया।

सीआई ने बताया कि:

“वीडियो की फॉरेंसिक और कानूनी जांच की जा रही है। अगर बयान में कोई दंडनीय अपराध प्रमाणित होता है, तो संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”


नगरपालिका विस्तार बन रहा टकराव की वजह

चिड़ावा नगरपालिका क्षेत्र में अडूका जैसे आस-पास के गांवों को शामिल किए जाने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई ग्रामीणों को आशंका है कि शहरी सीमा में शामिल होने से उन्हें जमीन, कर, और सुविधाओं में नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे पर कई गांवों में राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामुदायिक तनाव भी सामने आ रहे हैं।


विश्लेषण: भाषण से भड़क सकती थी सांप्रदायिक हिंसा

पूर्व सरपंच का यह भाषण केवल व्यक्तिगत गुस्से की अभिव्यक्ति नहीं था, बल्कि इससे गांव में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की आशंका पैदा हो गई थी। पुलिस की समय रहते कार्रवाई से स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। हालांकि, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने इस बयान की कड़ी निंदा की है।


निष्कर्ष

लोकतांत्रिक समाज में असहमति और विरोध प्रदर्शन की जगह हमेशा होती है, लेकिन अगर यह घृणा और हिंसा में बदल जाए, तो यह कानून और संविधान दोनों के खिलाफ है। इस मामले में प्रशासन का त्वरित हस्तक्षेप एक सकारात्मक संकेत है कि समाज में भड़काऊ बयानबाजी की कोई जगह नहीं है।

Written By

Monika Sharma

Desk Reporter

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