गोरखपुर: सिंघड़िया इलाके में अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की घटना के बाद जैसे ही आरोपी अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा का नाम सामने आया, पुलिस जांच में एक बड़े ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ। शुरुआती जांच ने ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जिनसे पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मच गया है।
पुलिस को मिले वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल चैट के आधार पर सामने आया है कि अंशिका बीते करीब पांच वर्षों में फर्जी दुष्कर्म केस में फंसाने की धमकी देकर लगभग डेढ़ सौ लोगों से धन उगाही कर चुकी है।
पीड़ितों में सामान्य नागरिकों के साथ-साथ अयोध्या में तैनात एक CO और गोरखपुर शहर के करीब 15 पुलिसकर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं। बदनामी और कानूनी डर के कारण कई लोग लंबे समय तक उसके जाल में फंसे रहे।
जांच में सामने आया है कि अंशिका का तरीका पूरी तरह योजनाबद्ध था।
वह पहले सोशल मीडिया मैसेंजर के जरिए संपर्क बढ़ाती, फिर वीडियो कॉल पर निजी बातचीत करती। बातचीत के दौरान रिकॉर्ड की गई वीडियो बाद में ब्लैकमेलिंग का मुख्य हथियार बन जाती थी।
ग्रामीणों के अनुसार, कोरोना काल में पिता की मौत के बाद पूरा परिवार बिखर गया। इसके बाद अंशिका और उसके परिवार की गतिविधियों को लेकर गांव में लगातार चर्चाएं होती रहीं। हालात ऐसे हो गए कि लोग उनके घर के आसपास जाने से भी कतराने लगे।
बताया जाता है कि परिवार के इकलौते बेटे ने करीब तीन साल पहले शादी के बाद गांव छोड़ दिया और पुणे में बस गया। इसके बाद उसने परिवार से लगभग सभी रिश्ते खत्म कर लिए। ग्रामीणों का कहना है कि जब अपने ही घर का बेटा भरोसा नहीं कर पाया, तो गांव वालों का भरोसा टूटना स्वाभाविक था।
ग्रामीणों के मुताबिक, अंशिका, उसकी मां और बहन को लेकर गांव में लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि पैसे लेकर किसी पर भी आरोप लगाने की प्रवृत्ति उनके व्यवहार में शामिल हो चुकी थी। डर के कारण लोग उनसे दूरी बनाए रखते थे।
गांव की महिलाओं का कहना है कि मां और बेटियां कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहती थीं और अचानक लौट आती थीं। इसी वजह से गांव में उनके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं फैलती रहीं और विश्वास पूरी तरह खत्म हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार, अंशिका आठवीं तक ही पढ़ पाई है, जबकि उसकी मंझली बहन किसी तरह दसवीं पास कर पाई। पढ़ाई सीमित होने के बावजूद उसका नेटवर्क काफी बड़ा और प्रभावशाली बताया जा रहा है।
गोरखपुर पुलिस अंशिका और उसके छह साथियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी कर रही है। मामला थार गाड़ी चोरी और फर्जी नंबर प्लेट से भी जुड़ा है। जांच में सामने आया कि गाड़ी पर चार अलग-अलग राज्यों की फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थीं।
अस्पताल मैनेजर पर गोली चलाने की घटना ने एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। अंशिका सिंह उर्फ अंतिमा का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर फैली भय, दबाव और अवैध उगाही की गंभीर तस्वीर पेश करता है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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