मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार को आए एक बड़े भूचाल के बाद अब सत्ता के गलियारों में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बारामती में हुए दुखद प्लेन क्रैश में उपमुख्यमंत्री अजित पवार (66) के आकस्मिक निधन के बाद, उनकी विरासत को संभालने के लिए उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि महाराष्ट्र सरकार में रिक्त हुए डिप्टी-CM के पद पर सुनेत्रा पवार को नियुक्त किया जा सकता है। वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन चर्चा है कि वे अब अजित पवार की पारंपरिक सीट बारामती से विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। एनसीपी के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और धनंजय मुंडे ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर उन्हें समर्थन देने का संकेत दिया है।
अजित पवार के जाने के बाद पार्टी के नेतृत्व को लेकर भी मंथन शुरू हो गया है। प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस संबंध में एनसीपी नेता जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे।
सबसे चौंकाने वाली चर्चा पार्टी के विपक्षी शरद पवार गुट के साथ विलय को लेकर है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सहानुभूति की लहर और परिवार को एकजुट रखने के दबाव में दोनों गुट फिर से एक हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस पर किसी भी गुट की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
केंद्रीय विमानन मंत्री राम मोहन नायडू के अनुसार, अजित पवार का Learjet-45 चार्टर्ड विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ।
विजिबिलिटी की कमी: पायलट ने कम दृश्यता के कारण पहली बार में लैंडिंग टाली और विमान को ऊंचाई पर ले गया।
दूसरा प्रयास: दोबारा लैंडिंग की कोशिश में विमान रनवे से पहले ही क्रैश होकर आग का गोला बन गया।
अनुभवी पायलट: विमानन कंपनी VSR वेंचर्स के मुताबिक, मुख्य पायलट के पास 16 हजार घंटे का फ्लाइंग अनुभव था। विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी।
इस हादसे में पवार के अलावा दो पायलट, एक सुरक्षाकर्मी और एक महिला क्रू मेंबर सहित कुल 5 लोगों की मौत हो गई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है।
अजित पवार के निधन ने न केवल उनके परिवार, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। सुनेत्रा पवार का डिप्टी-CM बनना और प्रफुल्ल पटेल की अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पार्टी को स्थिरता देने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, शरद पवार के साथ संभावित विलय भविष्य में राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।
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