जयपुर: राजस्थान में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में पुलिस कस्टडी में हुई 11 मौतों के मामलों को लेकर स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदेश के 135 पुलिस थानों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जहां राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में शपथ-पत्र पेश किया।
राज्य सरकार की ओर से दायर शपथ-पत्र में बताया गया कि राजस्थान में कुल 1050 पुलिस थाने हैं। इनमें से 915 थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, जबकि 135 थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अब भी लंबित है। इसके अलावा 10 पुलिस थानों की इमारतें निर्माणाधीन हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि पहले प्रत्येक पुलिस थाने में 6 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़ाकर 16 करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने 75.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है।
सरकार के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगाना ही पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कैमरे सही ढंग से काम करें और उनकी रिकॉर्डिंग जरूरत पड़ने पर उपलब्ध हो।
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई थानों में कैमरे होने के बावजूद वे या तो बंद रहते हैं या उनकी रिकॉर्डिंग सुरक्षित नहीं रखी जाती।
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को एक केंद्रीकृत सर्वर सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रणाली के माध्यम से सभी पुलिस थानों के सीसीटीवी कैमरों को जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी निगरानी, डेटा सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार सहित कई राज्यों ने अब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में शपथ-पत्र दाखिल नहीं किए हैं। इसके विपरीत राजस्थान, मध्यप्रदेश और केरल ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और ये राज्य मॉडल राज्य के रूप में उभरे हैं, जिनका अनुसरण अन्य राज्यों को करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 21 फरवरी को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के डीजीपी और गृह सचिव न्यायमित्र के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में भाग लेंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि जो राज्य समय पर और उचित शपथ-पत्र पेश नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 के आठ महीनों में राजस्थान में पुलिस कस्टडी में 11 लोगों की मौत हुई है। इसी को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों से पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या, उनके संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर जानकारी मांगी थी।
गौरतलब है कि दिसंबर 2020 में परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि देश के प्रत्येक पुलिस थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, लेकिन इस आदेश की पूरी तरह पालना अब तक नहीं हो सकी है।
राजस्थान सरकार ने सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने और बजट स्वीकृत करने का दावा किया है, लेकिन 135 पुलिस थानों में अब भी कैमरों का न होना गंभीर चिंता का विषय है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस सुधार केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
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