राजस्थान: के लालसोट क्षेत्र में स्थित एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांधों में से एक मोरेल बांध में प्रदूषित पानी पहुंचने का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। लालसोट विधायक रामविलास मीणा ने सदन में यह गंभीर मुद्दा उठाते हुए जल संसाधन मंत्री से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अमानीशाह नाले से आ रहे गंदे पानी को रोकने के लिए वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का सुझाव दिया।
विधायक मीणा ने विधानसभा में कहा कि जयपुर से निकलने वाला अमानीशाह नाला बड़ी मात्रा में गंदा और प्रदूषित पानी बहाकर लाता है। यह पानी आगे चलकर लालसोट विधानसभा क्षेत्र की मोरेल नदी में मिल जाता है। चूंकि मोरेल नदी पर ही मोरेल बांध स्थित है, इसलिए नाले का प्रदूषित पानी सीधे बांध के जल को प्रभावित कर रहा है।
मोरेल बांध का पानी आसपास के अनेक गांवों में सब्जी और अनाज की फसलों की सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। ऐसे में यदि पानी दूषित होगा तो इसका सीधा असर खेती, फसल की गुणवत्ता और आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।
विधायक ने बताया कि अमानीशाह नाले से आने वाला दूषित पानी रासायनिक तत्वों और गंदगी से युक्त होता है। यह पानी जब बांध में एकत्र होता है तो सिंचाई के माध्यम से खेतों तक पहुंचता है। इससे उगाई जाने वाली सब्जियों और अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने चिंता जताई कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो यह क्षेत्र के किसानों और उपभोक्ताओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है। किसानों को पहले ही मौसम और बाजार की मार झेलनी पड़ रही है, ऐसे में प्रदूषित पानी उनकी परेशानियों को और बढ़ा सकता है।
समस्या के समाधान के लिए विधायक रामविलास मीणा ने सुझाव दिया कि कानोता या सांभरिया के आसपास एक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यदि अमानीशाह नाले का पानी पहले शुद्ध किया जाए और उसके बाद मोरेल नदी में छोड़ा जाए, तो बांध का पानी प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक से युक्त ट्रीटमेंट प्लांट न केवल पानी को साफ करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा। इससे किसानों को स्वच्छ पानी मिलेगा और वे बेफिक्र होकर सिंचाई कर सकेंगे।
विधायक ने जल संसाधन मंत्री से आग्रह किया कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल्द से जल्द कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा व्यापक विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में जलस्रोतों की गुणवत्ता में लगातार गिरावट आती रहेगी। इसलिए दीर्घकालिक समाधान अपनाना समय की मांग है।
लालसोट क्षेत्र के किसान और ग्रामीण लंबे समय से इस समस्या को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि सिंचाई के लिए उपलब्ध जल ही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। यदि पानी दूषित होगा तो खेती पर सीधा असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार और प्रशासन को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। जल संरक्षण और शुद्धिकरण की दिशा में निवेश भविष्य के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।
मोरेल बांध में प्रदूषित पानी पहुंचने का मुद्दा अब राजनीतिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बन गया है। विधायक रामविलास मीणा द्वारा विधानसभा में उठाया गया यह मामला क्षेत्र के किसानों और आमजन की चिंताओं को सामने लाता है। यदि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो इससे न केवल जल की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की भी रक्षा हो सकेगी। अब नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
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