नुउक। ग्रीनलैंड में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ जनआक्रोश खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतरे और ट्रम्प के ग्रीनलैंड पर कब्जे को लेकर दिए गए बयानों का कड़ा विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।
बर्फीली सड़कों के बीच यह विशाल विरोध मार्च ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक के डाउनटाउन से शुरू होकर अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचा। लोग राष्ट्रीय झंडे लहराते हुए और ‘यांकी वापस जाओ’ तथा ‘मेक अमेरिका गो अवे’ जैसे नारे लगाते नजर आए। पुलिस के अनुसार यह ग्रीनलैंड के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है, जिसमें नुउक की लगभग एक-चौथाई आबादी शामिल रही।
प्रदर्शन के दौरान ट्रम्प के पुतले के साथ जुलूस निकाला गया। कई परिवार अपने बच्चों और नवजात शिशुओं के साथ भी प्रदर्शन में शामिल हुए। एक बच्चे के स्ट्रोलर पर लिखा था— मेरा पहला प्रोटेस्ट।
प्रदर्शन के बीच अमेरिका ने यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। ये वही देश हैं जिन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का खुलकर विरोध किया था। इस फैसले ने ग्रीनलैंड और यूरोपीय देशों में ट्रम्प के खिलाफ नाराजगी और बढ़ा दी।
यूरोपीय संघ के सांसद अब अमेरिका के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट की मंजूरी रोकने की तैयारी कर रहे हैं। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ट्रम्प की ग्रीनलैंड धमकियों के चलते अमेरिका से किसी भी समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है।
उन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर प्रस्तावित 0% टैरिफ को होल्ड करने की मांग की। यूरोपीय संसद के कई अन्य राजनीतिक समूह भी इस ट्रेड डील को फ्रीज करने के पक्ष में हैं। अगर बहुमत बनता है तो यह समझौता पूरी तरह रुक सकता है।
EU-US ट्रेड एग्रीमेंट को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पिछले साल तय किया था। इस समझौते के तहत अमेरिका ज्यादातर यूरोपीय वस्तुओं पर 15% टैरिफ लगाने पर सहमत हुआ था, जबकि EU ने अमेरिकी औद्योगिक और कुछ कृषि उत्पादों पर शुल्क खत्म करने का वादा किया था।
हालांकि ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प के आक्रामक रुख ने इस समझौते को गंभीर राजनीतिक संकट में डाल दिया है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रम्प के बयान को अस्वीकार्य बताया। यूरोपीय देशों ने कहा कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए और सहयोगी देशों को धमकियों के जरिए दबाव में नहीं लाया जा सकता।
EU पर फिलहाल अमेरिका का 15% टैरिफ लागू है। स्टील, कॉपर और एल्यूमीनियम उत्पादों पर यह दर 50% बनी हुई है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ग्रीनलैंड को लेकर समझौता नहीं हुआ तो 1 जून से टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।
ट्रम्प ने दावा किया कि चीन और रूस ग्रीनलैंड को हासिल करना चाहते हैं और केवल अमेरिका ही इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है।
डेनमार्क के समर्थन में फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ग्रीनलैंड में निगरानी मिशन के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेज रहे हैं।
EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि यह विवाद चीन और रूस के लिए बड़ा मौका बन सकता है और सहयोगी देशों के बीच दरार खतरनाक है।
ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है। NATO नियमों के मुताबिक एक NATO देश दूसरे NATO देश पर कब्जा नहीं कर सकता। ग्रीनलैंड तभी अमेरिका से जुड़ सकता है जब वह पहले स्वतंत्र हो और इसके लिए जनमत संग्रह व डेनिश संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प की आक्रामक नीति अब सिर्फ स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अमेरिका और यूरोप के रिश्तों के लिए भी बड़ा संकट बनती जा रही है। सड़कों पर उतरे लोग, EU की सख्त चेतावनी और बढ़ते टैरिफ संकेत दे रहे हैं कि यह विवाद आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और व्यापार दोनों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
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