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BRICS+ समिट पर सियासी घमासान: कांग्रेस ने PM मोदी से पूछा—“पश्चिम एशिया संकट पर क्यों चुप हैं ‘विश्वगुरु’?”

नई दिल्ली: BRICS+ समिट को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत इस वैश्विक मंच का इस्तेमाल कूटनीतिक समाधान के लिए क्यों नहीं कर रहा है।

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत इस साल BRICS+ समिट की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे में सरकार को इस मंच का उपयोग वैश्विक शांति और विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट के समाधान के लिए करना चाहिए।

“विश्वगुरु” की भूमिका पर सवाल

रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में कोई ठोस पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि केवल फोन कॉल या बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय संकट का समाधान नहीं निकलता, बल्कि आमने-सामने बातचीत और बहुपक्षीय मंचों पर चर्चा ज्यादा प्रभावी होती है।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को नाराज नहीं करना चाहते, इसलिए इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहे हैं।

पहले भी उठा चुकी है सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा हो। इससे पहले भी पार्टी ने आरोप लगाया था कि BRICS+ की अध्यक्षता भारत के पास होने के बावजूद पश्चिम एशिया संघर्ष पर कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया।

21 मार्च को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल की कार्रवाई की निंदा न करने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना है कि भारत को अपनी पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति के तहत निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए।

BRICS+ समिट 2026: भारत की बड़ी जिम्मेदारी

दरअसल, 2026 के लिए BRICS+ समिट की अध्यक्षता भारत के पास है। यह जिम्मेदारी 1 जनवरी 2026 को ब्राजील से भारत को सौंपी गई थी। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने 15 जनवरी को समिट की थीम, लोगो और वेबसाइट लॉन्च की थी।

भारत इस मंच के जरिए खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहता है।

भारत का विजन क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ने 2025 में रियो डी जनेरियो में आयोजित 17वें BRICS समिट के दौरान भारत की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया था। इनमें शामिल हैं—

  • Humanity First (मानवता पहले): वैश्विक नीतियों में आम लोगों के हितों को प्राथमिकता
  • Resilience & Innovation: नई तकनीकों और सहयोग के जरिए चुनौतियों से निपटना
  • Sustainability: जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण
  • Global South की आवाज: विकासशील देशों के हितों की वकालत
  • आतंकवाद विरोध और आर्थिक मजबूती

विपक्ष की चिंता क्या है?

कांग्रेस का मानना है कि इतने बड़े वैश्विक मंच की मेजबानी करने के बावजूद भारत पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सक्रिय भूमिका नहीं निभा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, BRICS+ एक ऐसा मंच है जहां उभरती अर्थव्यवस्थाएं मिलकर वैश्विक मुद्दों पर प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

सरकार की रणनीति क्या हो सकती है?

हालांकि सरकार की ओर से इस मुद्दे पर सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत संतुलन की नीति अपनाते हुए सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है।

भारत के अमेरिका, इजराइल और पश्चिम एशिया के कई देशों के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में किसी एक पक्ष के खिलाफ खुलकर बयान देना कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

BRICS+ समिट को लेकर उठे ये सवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक रणनीति पर भी रोशनी डालते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस मंच का उपयोग वैश्विक संकटों के समाधान के लिए किस तरह करता है।

Written By

Rajat Kumar RK

Desk Reporter

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