नई दिल्ली/केरल। केरल विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर की उम्मीदवारी को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस का दावा है कि चंद्रशेखर ने अपने चुनावी हलफनामे में महत्वपूर्ण संपत्ति की जानकारी छिपाई है, जो चुनावी नियमों का उल्लंघन है।
कांग्रेस के अनुसार, राजीव चंद्रशेखर के पास बेंगलुरु के पॉश इलाके कोरमंगला में लगभग 49,000 वर्गफीट में फैला एक आलीशान बंगला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 200 करोड़ रुपए बताई जा रही है। आरोप है कि इस संपत्ति का उल्लेख उनके द्वारा दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया।
केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि चंद्रशेखर पर पहले भी गलत जानकारी देने के आरोप लगते रहे हैं। पार्टी ने उन्हें “आदतन अपराधी” तक बताया और कहा कि वे चुनाव आयोग को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से अपील की है कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और पीपल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट के तहत राजीव चंद्रशेखर को अयोग्य घोषित किया जाए। पार्टी का कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठेंगे।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि 17 मार्च को इस कथित संपत्ति से संबंधित टैक्स भी जमा किया गया था, जो इस बात का संकेत है कि संपत्ति मौजूद है और उसे जानबूझकर छिपाया गया।
हालांकि इस मामले में भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी ने चंद्रशेखर को केरल की नेमोम सीट से उम्मीदवार बनाया है और चुनावी तैयारी में जुटी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा चुनावी माहौल में बड़ा विवाद खड़ा कर सकता है, खासकर तब जब पारदर्शिता और ईमानदारी जैसे मुद्दे चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं।
देश के पांच राज्यों—केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
आज असम, केरल और पुडुचेरी में नामांकन की आखिरी तारीख है, जबकि 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा।
चुनावी हलफनामे में उम्मीदवारों को अपनी संपत्ति, देनदारियां और अन्य वित्तीय विवरण पूरी पारदर्शिता के साथ देना होता है। यदि कोई उम्मीदवार जानबूझकर जानकारी छिपाता है, तो यह कानूनन अपराध माना जा सकता है और उसकी उम्मीदवारी रद्द हो सकती है।
इस मामले में कांग्रेस के आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस पर क्या कदम उठाता है।
राजीव चंद्रशेखर की उम्मीदवारी को लेकर उठे सवालों ने केरल चुनाव को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न केवल एक उम्मीदवार बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की विश्वसनीयता पर असर डाल सकता है। अब सबकी नजर चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी है।
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