सोनीपत: हरियाणा के भिवानी जिले के 70 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय एथलीट फूल कुंवार की मौत ने पूरे खेल जगत को झकझोर कर रख दिया है। जो खिलाड़ी कुछ ही घंटों पहले तीन मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रहा था, उसका शव रेलवे ट्रैक पर मिलने से यह मामला रहस्य और दर्द से भर गया है।
जानकारी के अनुसार, फूल कुंवार Khelo India के तहत चंडीगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर लौट रहे थे। उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए हाई जंप और हैमर थ्रो में गोल्ड मेडल और शॉट पुट में सिल्वर मेडल जीता था। जीत की खुशी के साथ वे अपने घर भिवानी लौट रहे थे, लेकिन यह सफर उनका आखिरी सफर साबित हुआ।
फूल कुंवार Kalka–New Delhi Shatabdi Express में सवार होकर चंडीगढ़ से दिल्ली होते हुए भिवानी जा रहे थे। बताया जा रहा है कि सोनीपत के राठधाना और नरेला के बीच उनका शव रेलवे ट्रैक पर मिला।
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंचा। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया।
फिलहाल इस घटना को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में यह संभावना सामने आई है कि या तो वे ट्रेन से गिर गए या फिर किसी ने उन्हें धक्का दिया।
हालांकि, अभी तक किसी भी थ्योरी की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी वजह से यह मामला पूरी तरह संदिग्ध बना हुआ है। सोनीपत जीआरपी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और ट्रेन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
21 और 22 मार्च को आयोजित प्रतियोगिता में फूल कुंवार ने अपनी उम्र को चुनौती देते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया था। 70 साल की उम्र में भी उनकी फिटनेस और जुनून युवाओं को प्रेरित करता था।
तीन मेडल जीतने के बाद वे बेहद उत्साहित थे और परिवार के साथ अपनी सफलता साझा करने के लिए घर लौट रहे थे। लेकिन कुछ ही घंटों में यह खुशी गहरे सदमे में बदल गई।
फूल कुंवार का खेल जीवन बेहद गौरवशाली रहा है। 1978 से 1986 के बीच उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों मेडल जीते।
उनके प्रमुख इवेंट शॉट पुट, पोल वॉल्ट (बांस कूद) और हैमर थ्रो रहे। खास बात यह है कि 1982 में उन्होंने पोल वॉल्ट में नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया था।
उन्होंने जर्मनी, मलेशिया, चीन और जापान जैसे देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कई प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए।
खेल के साथ-साथ फूल कुंवार ने सरकारी सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाई। 1978 में वे हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर भर्ती हुए और करीब 7 वर्षों तक सेवा दी।
इसके बाद 1982 में उन्होंने रेलवे विभाग में चीफ टिकट इंस्पेक्टर के रूप में काम किया और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। उनकी नौकरी भी खेल कोटे के आधार पर मिली थी।
रिटायरमेंट के बाद भी फूल कुंवार ने खेल से दूरी नहीं बनाई। वे मास्टर एथलेटिक्स में लगातार भाग लेते रहे और रोजाना सुबह-शाम दो-दो घंटे अभ्यास करते थे।
वे न सिर्फ खुद फिट रहते थे, बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी ट्रेनिंग देते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे।
परिजनों का कहना है कि फूल कुंवार पूरी तरह स्वस्थ और खुश थे। उनके साथ भिवानी के दो अन्य साथी भी ट्रेन में सफर कर रहे थे, ऐसे में सवाल उठता है कि यह घटना आखिर कैसे हुई।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है और रेलवे से सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने को कहा है।
फूल कुंवार की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई अनुत्तरित सवालों का सिलसिला है। एक ऐसे खिलाड़ी का यूं अचानक चले जाना, जिसने उम्र के आखिरी पड़ाव तक देश का नाम रोशन किया, बेहद दुखद है। अब सबकी नजरें जांच पर टिकी हैं, जो इस रहस्य से पर्दा उठाएगी।
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