राजस्थान: की राजधानी जयपुर में पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा संदेश सामने आया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने सोमवार को आयोजित राज्य स्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में स्पष्ट कर दिया कि कानून-व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह बैठक पुलिस मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें प्रदेश के सभी रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) शामिल हुए। दोपहर 2 बजे शुरू हुई यह बैठक शाम 6:30 बजे तक चली, जिसमें अपराध नियंत्रण, जन सुरक्षा और पुलिस कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर गहन समीक्षा की गई।
बैठक में सबसे ज्यादा जोर थानों के नियमित निरीक्षण पर दिया गया। डीजीपी ने कई जिलों के एसपी द्वारा औचक निरीक्षण नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी एसपी अपने-अपने क्षेत्रों के थानों का नियमित दौरा करें और जांच की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करें।
उन्होंने यह भी कहा कि थानों में कामकाज की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि फील्ड में जाकर वास्तविक स्थिति को समझना जरूरी है।
डीजीपी शर्मा ने पुलिस लाइन्स में मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन करने और उन्हें बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने लाइब्रेरी की स्थापना, पुलिस क्वार्टर्स की मरम्मत और कार्मिकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस योजना तैयार करने को कहा।
यह कदम पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार के उद्देश्य से लिया गया है।
आधुनिक दौर में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर डीजीपी ने विशेष चिंता जताई। उन्होंने सभी एसपी को निर्देश दिए कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की रोजाना समीक्षा करें और संबंधित पोर्टल पर निगरानी बनाए रखें।
सोशल मीडिया पर भी सतर्कता बरतने को कहा गया है। अपराधियों का महिमामंडन करने वाले कंटेंट पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही साइबर थानों को मजबूत करने, स्टाफ को प्रशिक्षित करने और लंबित मामलों को जल्द निपटाने पर जोर दिया गया।
डीजीपी ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) को और सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए और फील्ड स्तर पर सघन मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।
उदयपुर में हाल ही में एसीबी ट्रैप मामले के बाद स्पेशल टीमों को लेकर विवाद सामने आया था। इसके बाद डीजीपी ने निर्णय लिया कि अब केवल जिला स्तर की DST और कमिश्नरेट में CST टीमों को ही सक्रिय रखा जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
आगामी त्योहारों को देखते हुए डीजीपी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को खुद फील्ड में उतरकर गश्त बढ़ाने और पुलिस की विजिबिलिटी सुनिश्चित करने को कहा।
डीजीपी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया। राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज मामलों का समयबद्ध निस्तारण, ई-विजिटर पोर्टल से होटलों को जोड़ना और राजकॉप सिटीजन ऐप के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।
साथ ही निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों को अभय कमांड सेंटर से जोड़ने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जा सके।
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ड्रंक एंड ड्राइव अभियान तेज करने, ब्रेथ एनालाइजर के उपयोग को अनिवार्य बनाने और ई-प्रोसिक्यूशन सिस्टम के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया गया।
डीजीपी ने यह भी संकेत दिए कि अप्रैल महीने में इन निर्देशों की समीक्षा की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।
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