उत्तराखंड: के हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस के अवसर पर आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में गुर्जर समाज ने अपने अधिकारों और जनजाति (ST) दर्जे की मांग को लेकर एकजुटता का बड़ा संदेश दिया। सिद्ध स्रोत (गाजीवाली) में 24 मार्च को हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और अपने हकों के लिए सामूहिक आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कैबिनेट मंत्री Swami Yatishwaranand मौजूद रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथियों में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष Chaudhary Arvind Singh Gurjar, अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Colonel Dev Anand Gurjar और गुर्जर इतिहासकार Sushil Bhati शामिल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रोशन दीन गुर्जर ने की।
इस दौरान सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और मंच से समाज के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि गुर्जर समाज को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होना बेहद जरूरी है, तभी सरकार तक उनकी आवाज प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।
मुख्य अतिथि स्वामी यतीश्वरानंद ने अपने संबोधन में विशेष रूप से वन गुर्जर समुदाय की समस्याओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित होकर अपनी बात रखे, तो सरकार तक इन मुद्दों को पहुंचाया जा सकता है और समाधान की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने समाज के नेताओं द्वारा किए जा रहे जागरूकता प्रयासों की सराहना की और इसे सकारात्मक दिशा में बड़ा कदम बताया।
कार्यक्रम में इतिहासकार सुशील भाटी ने गुर्जर समाज के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह समाज हमेशा से संघर्षशील रहा है और आज भी अपने अधिकारों के लिए संगठित हो रहा है। उन्होंने युवाओं से अपने इतिहास को जानने और समाज के उत्थान में योगदान देने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद गुर्जर ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में गुर्जर-बकरवाल समुदाय को महत्वपूर्ण अधिकार मिले हैं। उन्होंने बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में इस समुदाय को ST आरक्षण सहित कई कानूनी लाभ प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड के वन गुर्जर, जो उसी समुदाय का हिस्सा हैं, अभी भी इन अधिकारों से वंचित हैं। इसलिए जरूरी है कि उन्हें भी समान अधिकार दिए जाएं। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के साथ संवाद स्थापित करें।
कार्यक्रम में कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यदि कोई सरकार इन मांगों को पूरा कर सकती है, तो उसके साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इस दौरान युवाओं की भूमिका पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज के युवा नेतृत्व आगे आए और अपने अधिकारों के लिए खुद आवाज उठाए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा शामिल थे। सभी ने मिलकर समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और अधिकारों की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।
अंत में पुष्पवर्षा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे का अभिनंदन किया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि सामाजिक जागरूकता और राजनीतिक भागीदारी का भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
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