जयपुर: का प्रमुख सरकारी अस्पताल जयपुरिया हॉस्पिटल इन दिनों एक गंभीर प्रशासनिक और संसाधन संकट से जूझ रहा है। वीआईपी और वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान लगातार बढ़ती मेडिकल ड्यूटी ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी को लेकर अस्पताल प्रशासन ने अब स्पष्ट रूप से अपनी सीमाएं तय कर दी हैं।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. जीवराज सिंह राठौड़ ने जयपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष मित्तल को पत्र लिखकर बताया है कि वर्तमान संसाधनों के साथ एक दिन में एक से अधिक VIP या VVIP के लिए मेडिकल टीम और एंबुलेंस की व्यवस्था करना संभव नहीं है।
जयपुर में जब भी कोई VIP या VVIP दौरा होता है, तो प्रशासन की ओर से संबंधित अस्पतालों को मेडिकल टीम, एंबुलेंस और ब्लड की व्यवस्था के निर्देश दिए जाते हैं।
लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है जब एक ही दिन में कई VIP मूवमेंट होते हैं। ऐसे में जयपुरिया हॉस्पिटल के पास पर्याप्त डॉक्टर, स्टाफ और संसाधन नहीं होते कि वह हर जगह ड्यूटी निभा सके।
अस्पताल प्रशासन ने अपने पत्र में साफ कहा है कि वह केवल एक VIP के लिए ही मेडिकल टीम और एंबुलेंस उपलब्ध करा सकता है। अन्य VIP के लिए यह जिम्मेदारी दूसरे अस्पतालों को दी जानी चाहिए।
इस समस्या का सबसे बड़ा कारण अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी है। अधीक्षक के अनुसार, अस्पताल पहले से ही सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहा है।
ऐसे में VIP ड्यूटी के लिए अलग से टीम तैयार करना काफी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अन्य अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से मेडिकल टीम की व्यवस्था की जाए।
जयपुरिया हॉस्पिटल में रोजाना करीब 3000 मरीज ओपीडी और आईपीडी में आते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर 24 घंटे चालू रहते हैं।
जब कई गंभीर मरीज एक साथ आते हैं, तो उन्हें उच्च स्तरीय इलाज के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। इसके लिए एंबुलेंस और मेडिकल टीम की जरूरत होती है।
अगर यही संसाधन VIP ड्यूटी में लग जाते हैं, तो आम मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ता है। यह स्थिति अस्पताल प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन चुकी है।
यह पहली बार नहीं है जब इस समस्या को उठाया गया है। मई 2025 में भी तत्कालीन अधीक्षक ने इसी तरह का पत्र लिखकर अपनी असमर्थता जताई थी।
उस समय भी कहा गया था कि एक से अधिक VIP मूवमेंट के दौरान सभी को मेडिकल सुविधाएं देना संभव नहीं है।
अस्पताल प्रशासन ने CMHO से अनुरोध किया है कि—
इससे अस्पताल अपने मुख्य कार्य—मरीजों के इलाज—पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेगा।
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था में एक अहम सवाल खड़ा करता है—क्या VIP ड्यूटी के चलते आम मरीजों की सुविधाओं से समझौता हो रहा है?
स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य आम जनता को बेहतर इलाज देना है, लेकिन जब संसाधन VIP मूवमेंट में व्यस्त हो जाते हैं, तो आम मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि VIP ड्यूटी के लिए अलग से मेडिकल व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि अस्पतालों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
जयपुरिया हॉस्पिटल का यह कदम स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को सामने लाता है। सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच VIP ड्यूटी का बढ़ता दबाव एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है।
अब जरूरत है कि प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और ऐसा समाधान निकाले, जिससे VIP व्यवस्था और आम मरीजों के इलाज के बीच संतुलन बनाया जा सके।
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