राजस्थान: के दौसा जिले से एक ऐसा मानवीय और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जिसने न्यायपालिका की संवेदनशीलता को नई पहचान दी है। यहां जिला एवं सत्र न्यायाधीश केशव कौशिक ने एक घायल व्यक्ति के प्रति ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।
दरअसल, एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ित को मुआवजे का चेक देने के लिए जज खुद कोर्ट रूम से बाहर निकलकर नीचे पहुंचे और गाड़ी में बैठे व्यक्ति को अपने हाथों से चेक सौंपा।
यह मामला पीपलखेड़ा निवासी भगवान सहाय से जुड़ा है, जो कई वर्षों से एक सड़क दुर्घटना के कारण गंभीर स्थिति में हैं। वर्ष 2017 में जयपुर-आगरा हाईवे पर महुआ थाना क्षेत्र में एक बाइक सवार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके चलते उनके शरीर का निचला हिस्सा काम करना बंद कर गया।
तब से भगवान सहाय बिस्तर पर हैं और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
दुर्घटना के बाद भगवान सहाय ने बीमा कंपनी से मुआवजे की मांग की थी। हालांकि, उन्हें उचित राशि नहीं मिलने पर उन्होंने वर्ष 2019 में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2023 में कोर्ट ने बीमा कंपनी को 16 लाख 75 हजार रुपए देने का आदेश दिया।
बाद में यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, लेकिन अंततः 19 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौते के आधार पर मामले का निस्तारण कर दिया गया।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई के बाद पीड़ित को मुआवजे का चेक सौंपा जाना था। लेकिन भगवान सहाय अपनी शारीरिक स्थिति के कारण कोर्ट के प्रथम तल तक नहीं पहुंच सकते थे।
ऐसे में जिला जज केशव कौशिक ने एक अलग ही मिसाल पेश की। वे खुद कोर्ट रूम से नीचे उतरकर आए और वहां खड़ी गाड़ी में बैठे भगवान सहाय को अपने हाथों से 16.75 लाख रुपए का चेक सौंपा।
यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था। एक जज का इस तरह संवेदनशीलता दिखाना और खुद पहल करना लोगों के दिलों को छू गया।
इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव संतोष अग्रवाल, पीड़ित के अधिवक्ता हुक्म सिंह अवाना और अन्य कोर्ट स्टाफ भी मौजूद रहे। सभी ने इस मानवीय पहल की सराहना की।
अधिवक्ता हुक्म सिंह अवाना ने बताया कि उनका मुवक्किल लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा था और अंततः उसे न्याय मिला।
जज केशव कौशिक का यह कदम केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह मानवता और संवेदनशीलता का प्रतीक बन गया। अक्सर न्यायालयों को केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित माना जाता है, लेकिन इस घटना ने यह साबित कर दिया कि न्याय के साथ-साथ मानवीय पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इस घटना के बाद सोशल और स्थानीय स्तर पर जज की काफी सराहना हो रही है। लोग इसे न्यायपालिका की सकारात्मक छवि के रूप में देख रहे हैं।
यह घटना समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि किसी भी पद पर रहते हुए मानवता और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है। जज का यह कदम यह दर्शाता है कि न्याय केवल फैसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीयता भी शामिल होनी चाहिए।
दौसा के जिला जज केशव कौशिक द्वारा उठाया गया यह कदम न्याय और मानवता के संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है। घायल पीड़ित को स्वयं जाकर चेक सौंपना न केवल एक सराहनीय पहल है, बल्कि यह समाज को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश भी देता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.