राज्यसभा: की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व उपसभापति Harivansh Narayan Singh की संसद में वापसी हो गई है। उन्हें राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य बनाया गया है। इसके बाद उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan ने उन्हें शपथ दिलाई।
हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो गया था, और इस बार उनकी पार्टी JD(U) ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। ऐसे में उनका राजनीतिक भविष्य अनिश्चित माना जा रहा था, लेकिन राष्ट्रपति के मनोनयन के बाद उन्होंने एक बार फिर संसद में एंट्री कर ली है।
69 वर्षीय Harivansh Narayan Singh अब 2032 तक राज्यसभा के सदस्य रहेंगे। उनका मनोनयन उस सीट पर हुआ है, जो पूर्व मुख्य न्यायाधीश Ranjan Gogoi के रिटायर होने के बाद खाली हुई थी।
राज्यसभा में कुल 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है।
हरिवंश पहले भी 2018 से 2024 तक राज्यसभा के उपसभापति रह चुके हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह एक बार फिर इस पद पर वापसी कर सकते हैं?
संविधान के आर्टिकल 89 के अनुसार, राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है। इसमें यह जरूरी नहीं है कि सदस्य निर्वाचित हो—मनोनीत सदस्य भी इस पद के लिए पात्र होते हैं।
यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है, तो Harivansh Narayan Singh एक बार फिर उपसभापति बन सकते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 18 मार्च को राज्यसभा में हरिवंश के विदाई समारोह के दौरान उनके भविष्य को लेकर संकेत दे दिया था।
उन्होंने कहा था कि हरिवंश ने सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और उनकी राजनीतिक यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है। इस बयान के बाद ही उनके वापसी की अटकलें तेज हो गई थीं।
Harivansh Narayan Singh को बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar का करीबी माना जाता रहा है। हालांकि हाल के समय में दोनों के संबंधों में कुछ दूरी की चर्चाएं भी सामने आई थीं।
फिर भी हरिवंश की यह वापसी राजनीतिक समीकरणों में नए संकेत देती है।
हरिवंश नारायण सिंह का करियर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और बाद में राजनीति में कदम रखा।
JD(U) के सदस्य के रूप में उन्होंने राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया और अपनी सादगी व निष्पक्ष कार्यशैली के लिए पहचाने गए। उपसभापति के रूप में उनके कार्यकाल को भी संतुलित और प्रभावी माना जाता है।
राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। वे न केवल विधायी कार्यों में हिस्सा लेते हैं, बल्कि विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ दृष्टिकोण भी प्रदान करते हैं।
मनोनीत सदस्य भी वोट डाल सकते हैं और उपसभापति जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।
हरिवंश नारायण सिंह की राज्यसभा में वापसी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। उनका अनुभव और पूर्व उपसभापति के रूप में कार्यकाल उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे एक बार फिर उपसभापति बनकर संसद में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे।
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