राजस्थान: में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ा एक्शन सामने आया है। Food Safety Department Rajasthan ने राज्यभर में 17 अलग-अलग ब्रांड के कई खाद्य उत्पादों की बिक्री और डिस्प्ले पर अस्थायी रोक लगा दी है। इनमें सबसे ज्यादा घी के 10 ब्रांड शामिल हैं, जबकि अन्य उत्पादों में चाय, हल्दी, नमकीन, टॉफी और रोस्टेड चना भी शामिल हैं।
यह कार्रवाई Jaipur में जारी आदेश के बाद की गई, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि इन उत्पादों के सैंपल जांच में ‘अनसेफ’ पाए गए हैं। इसके चलते अगले दो महीनों तक इन उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
फूड सेफ्टी विभाग द्वारा जारी सूची में कई लोकप्रिय और आमतौर पर उपयोग में आने वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इनमें बीकानेर की ‘युवराज बीकानेर’ ब्रांड की केसर बाटी, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की ‘बंगाल गोल्ड’ चाय पत्ती, भरतपुर की ‘श्री साई मसालेवाला’ हल्दी और इंदौर की ‘बालाजी’ नमकीन जैसे उत्पाद शामिल हैं।
इसके अलावा, हरियाणा और अन्य राज्यों में निर्मित रोस्टेड चने, टॉफी और अन्य स्नैक आइटम्स भी इस सूची में शामिल हैं। इनमें से कुछ उत्पाद Reliance Retail के स्टोर्स पर भी बेचे जा रहे थे, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।
सबसे बड़ी चिंता घी को लेकर सामने आई है, क्योंकि 10 अलग-अलग ब्रांड के घी को ‘अनसेफ’ घोषित किया गया है। ये ब्रांड हरियाणा, पंजाब, जोधपुर और पाली जैसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। इनमें ‘हरियाणा फॉर्म’, ‘भोग विनायक’, ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘धेनु सरस’ जैसे नाम शामिल हैं।
घी जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ का अनसेफ पाया जाना उपभोक्ताओं के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह सीधे स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मामला है।
फूड सेफ्टी अधिकारियों के अनुसार, इन उत्पादों के सैंपल लैब टेस्ट में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। कुछ मामलों में मिलावट, तो कुछ में निर्धारित मानकों से कम गुणवत्ता पाई गई। इसी आधार पर विभाग ने एहतियातन यह कदम उठाया है।
साथ ही जिन उत्पादों का निर्माण अन्य राज्यों में हो रहा है, वहां के संबंधित खाद्य सुरक्षा विभागों को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है। इसका मतलब है कि यह कार्रवाई केवल राजस्थान तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकती है।
इस फैसले का सीधा असर बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जिन दुकानों और रिटेल स्टोर्स पर ये उत्पाद उपलब्ध थे, उन्हें तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई व्यापारी इन उत्पादों को बेचता पाया गया, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं को भी सलाह दी गई है कि वे इन ब्रांड्स के उत्पादों का इस्तेमाल फिलहाल न करें और खरीदारी करते समय गुणवत्ता और ब्रांड की जांच अवश्य करें।
फूड सेफ्टी विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध अस्थायी है और दो महीने तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान संबंधित कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और दोबारा जांच कराने का मौका दिया जाएगा।
यदि अगली जांच में उत्पाद सुरक्षित पाए जाते हैं, तो उन पर लगी रोक हटाई जा सकती है। अन्यथा, कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है।
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