राजधानी: जयपुर में गुरुवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बड़ा हंगामा देखने को मिला। Rajasthan Housing Board की टीम जब बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करोड़ों की जमीन को खाली कराने पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों ने विरोध करते हुए पथराव कर दिया। हालात ऐसे बन गए कि अधिकारियों को कुछ समय के लिए कार्रवाई रोकनी पड़ी।
मामला शहर के बीटू बाइपास इलाके का है, जहां करीब 42 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा बताया जा रहा है। इस जमीन की कीमत 2200 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। हाउसिंग बोर्ड के अनुसार यह जमीन वर्षों पहले अधिग्रहित (अवाप्त) की जा चुकी थी, लेकिन वास्तविक कब्जा नहीं लिया जा सका था।
गुरुवार को उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और बाउंड्री वॉल, कोठरियां तथा अन्य अवैध निर्माणों को तोड़ना शुरू कर दिया। जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, वहां रहने वाले लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने हंगामा करते हुए जेसीबी मशीनों पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ महिलाओं ने भी इस विरोध में हिस्सा लिया और जेसीबी पर पत्थर फेंके।
अचानक हुए पथराव से मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ समय के लिए कार्रवाई रोक दी। हालांकि बाद में स्थिति नियंत्रित होने पर कार्रवाई फिर शुरू की गई।
हाउसिंग बोर्ड प्रशासन के मुताबिक इस जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया वर्ष 1989 में शुरू हुई थी और 1991 में इसे पूरा भी कर लिया गया था। लेकिन इसके बावजूद जमीन का भौतिक कब्जा नहीं लिया गया।
इसी बीच, कुछ भूमाफियाओं ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया और “जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति” के नाम पर कॉलोनी विकसित कर दी। आरोप है कि जमीन को 1981 के फर्जी खरीद दस्तावेजों के आधार पर बेचा गया और कई प्रभावशाली लोगों को बेहद कम कीमत पर प्लॉट आवंटित कर दिए गए।
जब इस कॉलोनी के नियमन (रेगुलराइजेशन) की बात सामने आई, तो Jaipur Development Authority (जेडीए) ने हाउसिंग बोर्ड से NOC मांगी थी। लेकिन तत्कालीन आयुक्त ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब जमीन पर 50% निर्माण भी नहीं है, तो इसे नियमित क्यों किया जाए।
इसके बाद इस पूरे मामले में सहकारी समिति के खिलाफ FIR दर्ज की गई और जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी गई।
हाल ही में कोर्ट के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन को इस जमीन का कब्जा लेने के निर्देश मिले थे। इसी के तहत गुरुवार को यह कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है और इसे अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।
जिस तरह से कार्रवाई के दौरान विरोध और पथराव हुआ, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह अवैध कब्जा बता रहा है।
जयपुर में 2200 करोड़ की जमीन पर चल रही यह कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण बनती जा रही है। जहां एक ओर सरकार सार्वजनिक जमीन को मुक्त कराना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वर्षों से बसे लोग अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद का कानूनी और सामाजिक असर और गहरा हो सकता है।
All Rights Reserved & Copyright © 2015 By HP NEWS. Powered by Ui Systems Pvt. Ltd.